Saturday, 29th April, 2017
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पड़ोसी के घर में चुपके से घुसते रंगे हाथों धरे गए मुशर्रफ़, कहा 'बिना सबूत पकड़ा गया मुझे'

25, Sep 2016 By Pagla Ghoda

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पिछले मिलिट्री तानाशाह परवेज़ मुशर्रफ को तब भारी बेइज़्ज़ती का सामना करना पड़ा जब वो अपने पड़ोसी के अपार्टमेंट में इन्फ़्लिटरेशन यानी के घुसपैठ करते रंगे हाथों धरे गए। मुशर्रफ के पड़ोसी श्रीमान नईम बेतकल्लुफ के अनुसार ये पहली बार नहीं है जब मुशर्रफ़ ने चोरी से उनके घर में घुसपैठ की कोशिशें की हैं।

नईम ने गुस्से से फुँकारते हुए मीडिया को बताया, “अजी मुशर्रफ़ साहब की तो आदत है मेरे घर में बार बार चुपके से घुसने की। दरअसल जितना टाइम वो फ़ौज में रहे उतना टाइम वो पडोसी मुल्क में घुसने की कोशिशें करते रहे। अब फ़ौज और ओहदा तो रहा नहीं तो मुझ पड़ोसी के घर में ही घुसना चाह रहे हैं। बेहद ही शर्म की बात है जनाब।”

मिस्टर मुशर्रफ़ ने पहले पहल इस मुद्दे पर कोई भी टिपण्णी करने से इनकार किया, पर बाद में खूब सारे माइक और कैमरा उनकी और बढ़े देखकर उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने कहा, “देखिये, मसला ये है के नईम की तो आदत है बिना सबूत के मुझ पर इलज़ाम लगाने की। माना के जिस समय पुलिस ने मुझ पर टॉर्च मारी, उस समय मैं नईम की बरामदे में था। माना के मैं उस समय उसके घर में घुसने की कोशिश कर रहा था। पर इस बार का सबूत क्या है के मैं ऐसा कर रहा था? जिन भी लोगो ने मुझे देखा वो सब गवाह हैं। सबूत तो कोई नहीं है न? सबूत लाओ के मैंने घुसपैठ की है। बिना सबूत इलज़ाम मत लगाओ।”

मीडिया से बात करते मुशर्रफ़
मीडिया से बात करते मुशर्रफ़

इसी बीच केजरीवाल जी जो के इस्लामाबाद में हो रहे लिटरेचर फेस्टिवल में बतौर गेस्ट बुलाये गए हैं उनकी कारों का काफिला वहां से गुज़रते गुज़रते भारी मीडिया प्रेसेंस को देख के रुक गया। केजरीवाल जी तुरंत भाग के मीडिया के पास आये और तुरंत ही सारे कैमरा और माइक उनकी ओर घूम गए। चश्मा ठीक करते हुए केजरीवाल जी बोले, “देखो यार कोई किसी और के घर में चुपके से घुसे तो वो बहुत ही गन्दी बात है, खुलेआम घुसना चाहिए। मुशर्रफ़ जी को चाहिए था के वो पड़ोसी के घर के आगे धरना दें और तब भी वो न माने तो उसे साइकोपैथ कह दें। आज की डेट में दिल्ली में हो रहे चमत्कारों की जो चर्चा यहाँ पाकिस्तान में भी पहुँच चुकी है न, वो मेरे इन्ही करतबों के कारण हुआ है।”

इसके बार आशुतोष जी ने केजरीवाल जी के कान में कुछ कहा और वो फौरन अपनी गाड़ियों के काफिले में बैठ के वहां से रवाना हो गए। जब कैमरा और माइक वापिस मुशर्रफ़ की ओर बढ़े तो पाया गया के मुशर्रफ़ अपने पडोसी के रेलिंग पे आधे चढ़े हुए थे और अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। उनके ऊपर जब कैमरा की स्पॉटलाइट आयी तो वो आधे लटके-लटके ही ज़ोर से चीख पड़े “मैं नहीं कर रहा घुसपैठ, सुबूत कहाँ हैं? कहाँ है सुबूत?”



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