Monday, 26th June, 2017
चलते चलते

जीप कंपनी ने J&K के लिए निकाला नया मॉडल, बोनेट पर भी लगाई जाएगी एक सीट

26, May 2017 By Pagla Ghoda

श्रीनगर, भारत: देश भर के लिबरल और सेक्युलर पत्रकारों के बीच तब एक सनसनी की लहर फ़ैल गयी जब ये खबर आयी जीप कंपनी ने ख़ास जम्मू और कश्मीर इलाके के लिए जीप का एक नया मॉडल तैयार किया है जिसमें एक सीट बोनेट पे भी लगी रहेगी। जीप कंपनी ने हालाँकि औपचारिक तौर पे इस खबर के सच होने का समर्थन नहीं किया, परन्तु इस मुद्दे पर अफवाहों काबाजार गर्म होते देर नहीं लगी। ट्विटर पे इस बात पर पहला ट्वीट होने के बारह घंटे के अंदर अंदर कई बड़े न्यूज़ चैनलों पर ये खबर फ़्लैश की जाने लगी। इस लेख के लिखे जाने तक, बाइसन्यूज़ चैनलों पर करीब पैंतीस शोज और डिबेट्स भी इस मुद्दे पर हो चुकी हैं।

रक्षा विशेषज्ञ श्री मोलारजी टिपणिस ने इस मुद्दे पर चुटकी लेते हुए कहा, “देखिये जनाब कबूतरों के बीच बिल्ली छोड़ देंगे तो शोर तो मचेगा ही। इसलिए सेक्युलर मीडिया में दर्द भरी चीखें तोआएंगी ही। लेकिन J&K जैसे रीजन में आर्मी को डेकोरम बनाये रखने के लिए ऐसे ही एक वाहन की ज़रुरत है। इंटरनेट पर इस वाहन की स्पेसिफिकेशन पढ़ें तो बोनेट पर एक कांटेदार सीट लगी होगी ठीक सामने की तरफ, जिसपर पत्थर बाज़ों को उकसाने वाले लोगों को मोटे रस्सों बाँध दिया जायेगा। मोटी रस्सी रखने के लिए उसी सीट के नीचे एक बड़ा बॉक्स वाला कैबिनेट दिया गया है। तो काफी काम हुआ है इस डिजाइन पे। मज़े की बात ये है के ऐसे किरदार जिन्हे मैं उक्साओवादियों के नाम से बुलाता हूँ, उन्हें अगर जीप के आगे रेगुलर बेसिस पे बाँधा गया तो न केवल वो एक हयूमन शील्ड का काम करेंगे, पर इस तरह की पब्लिक परेड से उनकी काफी फजीहत भी होगी। ये तो विन विन सिचुएशन है साहब।”

किसी को दुबारा ना बाँधना पड़े
किसी को दुबारा ना बाँधना पड़े

जहाँ कुछ विशेषज्ञ इसे एक मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं वहीँ देश के मशहूर सेक्युलर लिबरल पत्रकारा श्रीमती जग्भार्या जोंस ने इस घोषणा की कड़े शब्दों में निंदा की है। फेकिंग न्यूज़ ने उनसे इसबारे में बात की।

रिपोर्टर: जग्भार्या जी आपका क्या कहना है इस नए जीप डिज़ाइन के बारे में?

श्रीमती जग्भार्या: (गुस्से में फुंक्कारते हुए) हद्द होती है हयूमन राइट्स वॉयलेशन की। हमारे देश में कुछ कानून भी है के नहीं। मासूम नागरिकों को … ”

रिपोर्टर: एक मिनट, एक मिनट, आपने बोला, मासूम नागरिक। क्या आप मानती हैं के वहां के लोग भारतीय नागरिक हैं, यानी के जम्मू एंड कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है?

श्रीमती जग्भार्या: देखिये आप ट्रिक क्वेश्चन मत पूछिए? .. मैंने ऐसे कुछ नहीं कहा, इस पार्ट को आप एडिट आउट कीजिये। मैंने बस इतना कहा के मासूम लोगों के साथ दुर्व्यवहार बंद किया जाए।

रिपोर्टर: इस बारें में पाकिस्तान क्या सोचता है?

श्रीमती जग्भार्या: देखिए हमारा प्यारा पाकिस्तान बड़ा ही सीधा सा …. एक मिनट, पाकिस्तान क्या सोचता है मुझे क्या मालूम, मैं तो एक हिंदुस्तानी हूँ, आप एक एक बाद एक ट्रिक सवाल कर रहे हैं, मैं इस इंटरव्यू को छोड़ के जा रही हूँ।

रिपोर्टर: रुकिए रुकिए प्लीज। अच्छा अब एक सीधा सवाल, ये जो बोनेट पे सीट लगी होगी, वो मुलायम होनी चाहिए या खुरदुरी।

श्रीमती जग्भार्या: मुलायम हो तो बढ़िया रहेगा क्योंकि … क्या मतलब, अरे ये सीट होनी ही नहीं चाहिए, पत्थरबाज़ हमारे भाई बंधू ही हैं, उन्हें पत्थर फेकने का पूरा हक़ है, क्योंकि वो अभिव्यक्ति की आज़ादी है।

रिपोर्टर: और जिन सैनिकों को पत्थर लगते हैं, उनके अधिकार?

श्रीमती जग्भार्या: मुझे जाना होगा, मेरा एक और अपॉइंटमेंट है। (माइक उतार कर चले जाती हैं।)

हालाँकि अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है के ये बोनेट पर सीट वाली खबर सत्य है या अफवाह, पर अखिल भारतीय वेल्डर एंड कारपेंटर परिषद् ने आर्मी के सामने पेशकश की है के उनकी परिषद् बिना किसी शुल्क के आर्मी की दो सौ जीपों के बोनेट पर एक-एक कुर्सी वेल्ड करने को तैयार हैं। चूंकि इस कुर्सी पर उक्साओवादियों को बांधे जाने के बाद मीडिया में उसकी काफी तसवीरें भी छापती हैं, इसलिए कुछ मार्केटिंग कंपनियों ने ये भी पेशकश की है के कुर्सी के ठीक पीछे एक विज्ञापन स्पेस बनाकर उसकी बिक्री भी की जाए,जिससे पत्थरबाज़ी से घायल जवानों का इलाज भी किया जा सके।



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