Wednesday, 20th September, 2017

चलते चलते

डोकलाम में तीन-पत्ती खेलते पकड़े गए भारत और चीन के सैनिक, युद्ध शुरू ना होने से हो रहे थे बोर

17, Aug 2017 By Ritesh Sinha

डोकलाम/सिक्किम. डोकलाम में कल चीन और भारत के सैनिकों को तीन-पत्ती खेलते हुए उनके बड़े अफसरों ने रंगे हाथ पकड़ लिया। दरअसल, ये सैनिक दो महीने से वहां तैनात हैं और दिन भर मुस्तैदी से खड़े रहते हैं। लेकिन सरकारें ना उन्हें आगे बढ़ने का आदेश देती हैं और ना ही वापस आने का! जब इन सैनिकों को बॉर्डर पर भेजा गया था, तो उन्हें बताया गया था कि इस बार कुछ हाथ चलाने का मौका भी मिलेगा, लेकिन दो महीनों से ऐसा कुछ नहीं हुआ। मजबूरी में टाइम पास करने के लिए उन्होंने ताश की गड्डी का सहारा लिया और बैठ गए दोनों देशों के सैनिक बाजी खेलने!

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“तुमने मेरे पत्ते देख लिये थे हींग झोंग!”

“जब तक नेता लोग कुछ डिसाइड करें, तब तक क्यों ना एक-एक बाज़ी हो जाए?” इधर से एक सैनिक ने ऑफ़र दिया। थोड़ी ही देर में चीनी सैनिकों ने भी उधर से ताश खेलने का इशारा कर दिया और ताश का मैदान बिछ गया। पहली बाज़ी में भारत की ओर से जोरावर सिंह ने जोर मार दिया और चीन के सैनिक हींग-झोंग से 50 युआन अन्दर कर लिए। दो-तीन बाज़ी जीतने के बाद जोरावर सिंह बाज़ी से उठने लगा (जैसा कि अक्सर इंडिया में होता है) तो चीनी सैनिक गुस्सा हो गए। सबने अपनी राइफलें तान दी। “अच्छा! तो तू हमारे पैसे जीतकर बाज़ी से भाग रहा है! अभी गेम ख़तम नहीं हुआ है, हमारे पास अभी बहुत पैसा है! ऐसे जीतकर जाने नहीं देंगे तुम्हे!” -एक चीनी सैनिक ने टूटी-फूटी हिंदी में कहा। राइफल देखकर जोरावर ने अपने दोनों हाथ ऊपर कर लिए और बोला- “ठीक है भाई! राइफल नीचे करो! मैं कहीं नहीं जा रहा हूँ! सू-सू करके आता हूँ, फिर दो-तीन बाज़ी और खेलेंगे!”

थोड़ी देर बाद फिर से ताश की गड्डी निकाली गई और इस बार सैनिकों ने चार घंटे तक तीन-पत्ती/अन्दर-बाहर खेली। बीच-बीच में ये लोग आपस में ही उलझ जाते थे, और अपनी-अपनी राइफलें तान लेते थे। पांच हज़ार ‘युआन’ अन्दर करने के बाद GD टक्कर सिंह ने चीनियों को ललकारते हुए कहा, “है कोई माई का लाल जिसके पास पैसा बचा हो?” यह सुनकर सभी चीनी सैनिकों ने अपनी जेब में हाथ डालकर देखा, लेकिन किसी के पास पैसे नहीं बचे थे। तभी उन्होंने देखा कि उनके बड़े अफसर जीप में सवार होकर उनकी ओर आ रहे हैं, जल्दी-जल्दी में ताश की गड्डी उठाई गई और सैनिक तैनाती वाली जगह पर भागने लगे। “इस हार का बदला हम लेकर रहेंगे?” -एक चीनी सैनिक ने जाते-जाते कहा। “जा-जा बहुत देखे हैं तेरे जैसे!” -जोरावर सिंह ने ताश की गड्डी अपनी जेब में ठूंसते हुए जवाब दिया। उधर, अफसरों ने इन लोगों को ताश खेलते हुए दूर से ही देख लिया था।

क्या इन सैनिकों पर कोई एक्शन लिया जाएगा? ऐसा पूछे जाने पर मेजर शेर सिंह राणा ने बताया कि “देखिए! हमारे सभी सैनिक बहादुर हैं, मौत से नहीं डरते। लेकिन उनको कुछ हाथ-पैर चलाने का आर्डर मिले तब ना! इसलिए इनकी कोई गलती नहीं है, दो महीने से एक ही जगह पर खड़े हैं। एक दूसरे का चेहरा याद हो गया है, टाइम-पास करने के लिए ताश की गड्डी निकाल ली तो कोई बात नहीं! इस छोटी सी बात पर हम सैनिकों पर कार्रवाई नहीं करेंगे!”



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