Saturday, 25th March, 2017
चलते चलते

सालों से आतंकी के साथ रह रही थी 'हूर' और वो उसे बीवी समझता रहा

26, Jul 2016 By बगुला भगत

पेशावर. कहावत है कि जिसे ढूंढा गली गली, वो घर के पिछवाड़े मिली! पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर प्रांत के कबायली इलाक़े में रहने वाले रहमतुल्ला नाम के एक आतंकवादी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। जिस हूर के चक्कर में वो बम फोड़कर ऊपर पहुंचा, पता चला कि वो तो कई सालों से उसकी बीवी बनकर उसके साथ धरती पर ही रह रही थी।

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हूर के लिये जन्नत रवाना होते रहमतुल्ला और उसके साथी

जब जन्नत के अधिकारियों ने उसे बताया कि “तुम्हारे हिस्से की हूर तो हमने नीचे ही भेज दी थी”, तो उसके पैरों के नीचे से बादल सरक गये। वो बोला- “कब? कहां?” अधिकारियों ने बताया कि “जिसके साथ तुम रह रहे थे, वही तो थी हूर!” रहमतुल्ला अधिकारी के पंख पकड़कर चिल्लाया- “क्या बकवास कह रहे हो?”

“और तुम्हें क्या लगता है कि हूर के चार पैर होते हैं!” -अधिकारी पंख छुड़ाकर बोला। रहमतुल्ला सर पकड़कर बैठ गया और बोला- “तुम लोगों ने पहले क्यूं नहीं बताया?”

“हमारा आदमी बताने तुम्हारे घर गया था लेकिन जब उसने लौटकर बताया कि तुम उसे ‘हूर’ कह तो रहे थे, तो हमें लगा कि तुमने उसे पहचान लिया है!” -अधिकारी बोला।

“रात में तो धरती पे हर कोई अपनी बीवी से ऐसा ही कहता है।” -रहमतुल्ला ने मुंह बनाते हुए कहा।

फिर बोला- “और तुम लोगों ने उसे नीचे क्यूं भेजा, उससे मेरी शादी क्यूं करायी? यहां उसके साथ मुझे और भी बहुत सारी मिलतीं!”

अधिकारी ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा- “असल में, जब हमने हूरों का concept शुरु किया था, तब से तुम्हारी दुनिया की आबादी बहुत बढ़ गयी है और तुम लोग भी थोक के भाव में आने लगे हो, जबकि हमारी हूरें उतनी की उतनी ही हैं। बहत्तर छोड़ो, अब तो हिस्से में एक-एक भी नहीं आ रही।”

“इसलिये हमने उससे कहा कि तुम नीचे धरती पे चली जाओ और वहीं पहुंचकर रहमतुल्ला की इच्छा पूरी कर दो। उसकी एक बूढ़ी मां है, एक छोटी बहन है, जो उसके बिना जी नहीं पायेंगी लेकिन वो तुम्हारे चक्कर में उन सबको छोड़कर ऊपर आना चाहता है। वो मरने के लिये मरा जा रहा है!”

रहमतुल्ला गिड़गिड़ाया- “प्लीज, एक बार मुझे धरती पे वापस भेज दो। मैं सबको बता दूंगा कि मरने से कोई फ़ायदा नहीं है, हमारी हूरें यहीं ट्रांसफ़र की जा रही हैं।” अधिकारी बोला- “सॉरी! एक बार आने के बाद यहां से कोई वापस नहीं जाता।” यह सुनते ही रहमतुल्ला गश खाकर गिर पड़ा। अंतिम समाचार लिखे जाने तक जन्नत के कर्मचारी उसके मुंह पर पवित्र जल के छींटे मार रहे थे लेकिन उसे होश नहीं आ रहा था।



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