Sunday, 22nd October, 2017

चलते चलते

F-16 लड़ाकू विमानों पर नवाज़ शरीफ़ और ओबामा के बीच सौदेबाज़ी कैसे बिगड़ीः बातचीत लीक

03, May 2016 By बगुला भगत

वॉशिंगटन. अमेरिका ने पाकिस्तान को आठ F-16 लड़ाकू विमानों की क़ीमत में छूट देने से इनकार कर दिया है और एक महीने के अंदर पूरा पेमेंट करने का कहा है। नवाज़ शरीफ़ और बराक ओबामा के बीच इस सौदेबाज़ी को लेकर जो बातचीत हुई, वो व्हाइट हाउस में लगे फ़ेकिंग न्यूज़ के ख़ुफ़िया कैमरे में रिकॉर्ड हो गयी। पेश है उस बातचीत का पूरा ब्यौराः-

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ओबामा को अपनी पासबुक खोलकर दिखाते नवाज़ शरीफ़

ओबामा- आइए…आइए शरीफ़ साब आइये! और सुनाइये, होटल के बिल का पेमेंट कर दिया आपने? शरीफ़- अब आपको हम पे इतना भी भरोसा नहीं रहा! सुबह चेक-आउट करने से पहले कर देंगे। ओबामा- नहीं, वो आप पिछली बार बिना पेमेंट किये ही निकल गये थे ना, इसलिये… शरीफ़- वो तो मिसअंडरस्टैंडिंग हो गयी थी। मुझे लगा कि मेरी सेक्रेटरी ने कर दिया होगा और उसे लगा कि मैंने… ओबामा- अच्छा, चलो ये सब छोड़ो! F-16 के प्राइस के बारे में क्या कह रहे थे आप? शरीफ़- यही कह रहा था कि रेट थोड़ा ठीक लगा लो! ओबामा- इससे कम नहीं हो पायेगा। मैंने आपको फ़ोन पे पहले ही बता दिया था। अगर पैसे नहीं हैं तो रहन दो। जेट लेना कोई ज़रूरी थोड़े… शरीफ़- नहीं भाईसाब…दो-चार जेट तो घर में होने ही चाहिये। पड़ोसियों के पास इतने सारे और हमारे पास एक भी ना हो तो अच्छा नहीं लगता… ओबामा- तो कुछ कम ले लो। चार से काम चला लो! शरीफ़- नहीं भाईसाब, लेने तो आठ ही हैं! ओबामा- तो रेट तो यही रहेगा। लेना है तो बोलो! शरीफ़- अभी तो हमें आपसे और भी बहोत समान लेना है। देख लो… ओबामा- रेट यही रहेगा भाईसाब! चाहे आठ लो या आठ सौ! शरीफ़- ऐसा मत कहिये…हमारा-आपका इतने सालों का रिलेशन है… ओबामा- सुबह का टाइम है शरीफ़ भाई, आपसे झूठ नहीं बोलूंगा। मुझे भी इसमें कुछ ज़्यादा नहीं बच रहा। (तभी शरीफ़ सौ मिलियन का चेक निकालकर ओबामा के हाथ में देने लगते हैं) शरीफ़- रख लो, बस अब कुछ मत कहो! ओबामा- शरीफ़ भाई नहीं हो पायेगा। अगर होता तो मैं आपको पहले ही बता देता। शरीफ़- अच्छा चलो, ना आपकी ना मेरी! ढाई सौ मिलियन पे सौदा डन करो। अब मना मत करो! ओबामा- नहीं…सात सौ मिलियन से एक पैसा कम नहीं! लेना है तो लो, नहीं तो… शरीफ़- सात सौ मिलियन डॉलर! इतने शॉर्ट नोटिस पे…कहां से आयेगा भाईसाब? ओबामा- क्यूं? आप पे कौन सी पैसे की कमी है! शरीफ़- आपको तो हमारे देश की हालत पता ही है भाईसाब… ओबामा- मैं देश की नहीं, आपकी बात कर रहा हूं। अपने पर्सनल अकाउंट से निकाल लो। इतने तो उसमें भी पड़े होंगे। शरीफ़ (सकपकाते हुए)- आजकल हालत बहोत टाइट हो रखी है। लो, आप ख़ुद देख लो! इसमें तो गोले खरीदने के भी पैसे नहीं हैं। (पासबुक खोलकर दिखाते हैं) ओबामा- अजी छोड़ो! ये खाली पासबुक मत दिखाओ। वे जो और बीसियों अकाउंट हैं, उन्हें क्यूं नहीं दिखाते! शरीफ़ (झेंपते हुए)- आप भी पता नहीं कहां-कहां की बात करते रहते हो। हम पे कहां और अकाउंट धरे हैं! ओबामा- तो कुछ गिरवी रख दो। शरीफ़- अब गिरवी रखने को क्या बचा है, सारा देश तो पहले ही गिरवी रखा है भाईसाब! (तभी ओबामा बराबर में रखा रजिस्टर उठाकर देखते हैं) ओबामा- और अभी आपकी तरफ़ पिछला भी बहोत सारा पेमेंट बाक़ी है। शरीफ़- वो भी आ जायेगा भाईसाब…हम कहां भागे जा रहे हैं! ओबामा- अजी आपका क्या भरोसा! कल को आर्मी ने आपको हटा दिया तो फिर हम किससे मांगते फिरेंगे। (तभी शरीफ़ ओबामा के कान में फुसफुसाते हुए कहते हैं) शरीफ़- अगर इंडियन करेंसी में पेमेंट करूं तो चलेगा क्या? ओबामा- 700 मिलियन डॉलर…इंडियन करेंसी में! इत्ती इंडियन करेंसी आपके पास कहां से आयी? शरीफ़- आप ये सब छोड़ो! बस ये बताओ…ले लोगे क्या? ओबामा- नहीं जी, उसे आप इंडियन मार्केट में ही चलाओ…हमें तो डॉलर में ही दे दो। (यह सुनकर शरीफ़ सोच में पड़ जाते हैं) ओबामा- जल्दी करो शरीफ़ भाई…दूसरी पार्टी का भी फ़ोन आ रहा है… शरीफ़- एक मिनट रुको तो सही… (थोड़ी देर सोचने के बाद किसी को फ़ोन लगाते हैं) शरीफ़- हैलो…हैलो! शिनपिंग भैय्या…शरीफ़ बोल रहा हूं…वो थोड़े पैसे चहिये थे…अर्जेंट…क्या कहा…बदले में पीओके में ज़मीन चहिये…ठीक है…आर्मी से बात करके बताता हूं…ओके…एक हफ़्ते में आपको वापस कॉल करता हूं…थैंक यू…थैंक यू शिनपिंग भाई! (फ़ोन रख देते हैं) ओबामा- क्या हुआ…कुछ बात बनी? शरीफ़- हां, इंतज़ाम तो हो जायेगा…लेकिन थोड़ा टाइम लगेगा। ओबामा- चलो, एक महीना दिया। लेकिन तब तक पक्का बता देना, नहीं तो मैं दूसरे कस्टमर को… शरीफ़- नहीं ओबामा भाई, मैं उससे पहले ही बता दूंगा… ओबामा- ठीक है तो फिर…मैं आपके जवाब का वेट करुंगा।

इसके बाद दोनों उठते हैं, एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं और हंसते हुए मीडिया के सामने फ़ोटो खिंचवाने लगते हैं।



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