Friday, 24th March, 2017
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ख़ुद पर हो रहे परीक्षणों के ख़िलाफ़ एकजुट हुए दुनिया भर के चूहे, इंसानों को दिया 3 दिन का अल्टीमेटम

27, Apr 2016 By बगुला भगत

लॉस एंजिलिस. इंसान सैंकड़ों सालों से चूहों पर मनचाहे परीक्षण करता चला आ रहा है, लेकिन यह सब अब इतना आसान नहीं रहने वाला। दुनिया भर के चूहे इन परीक्षणों के ख़िलाफ़ एकजुट हो गये हैं। वे इस बात से नाराज़ हैं कि “इंसान अपनी पसंद-नापसंद जानने के लिये हम पर टेस्ट क्यों करते हैं!”

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बैठक शुरु होने से पहले ‘मूषक-गान’ की धुन बजाते चचा मिकी

इंटरनेशनल रैट एंड माइस एसोसिएशन (इरमा) के चेयररैट श्री स्टुअर्ट लिटिल की अध्यक्षता में न्यूयॉर्क की पुरानी सुरंग में आज एक आपात बैठक हुई, जिसमें दुनिया भर के कोने-कोने बिल-बिल से आये चूहों ने भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए ‘इरमा’ के मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य मिकी माउस ने कहा कि “हमें इंसानों को डेढ़-दो महीने का टाइम देना चाहिये। अगर वे फिर भी अपने टेस्ट बंद नहीं करते तो हमें आगे की कार्रवाई पर विचार करना चाहिये।”

यह सुनकर कुछ नौजवान चूहे भड़क गये। कुतरकी पांडे नाम के चूहे ने कहा- “चाचा, इंसानों के साथ रहते-रहते तुम भी उन्हीं की भाषा बोलने लगे हो।” उसने दांत किटकिताते हुए चेतावनी दी कि “अगर उस बीसी स्टीफ़न नाम के डॉक्टर ने मुझे दवा की एक भी डोज और दी, तो मैं उसके पिछवाड़े में घुस जाऊंगा।”

“इन चू@%*$ इंसानों को जब भी अपने बारे में कुछ पता लगाना होता है, हमारी बॉडी में इंजेक्शन ठोक देते हैं।” -कुतरकी आगे बोला।

“बताओ, फ्राइडे की रात को 2 बजे सेक्स करने के बाद इंसान का क्या खाने का मन करता है, ये भी BC हम ही बतायेंगे!” -एक अन्य चूहे ने कहा। चचा मिकी ने उसे समझाना चाहा- “वो इसलिये बेटा, क्योंकि हमारा दिमाग़ इंसानों से मेल खाता है।”

“लेकिन उनकी आदतें तो गिरगिट और गधे से ज़्यादा मिलती हैं, फिर टेस्ट पैंचो हम पे क्यूं करते हैं?” -कहते कहते उसके नथुनों से झाग निकलने लगे।

उसने आगे कहा- “और लाल रंग की प्लेट में खाने से उन्हें भूख कम क्यों लगती है, इसका हमारे कचरे से क्या मेल?” खाने का ज़िक्र आते ही चूहों के पेट में चूहे इंसान कूदने लगे और सभा में भगदड़ मच गयी और चचा मिकी उन्हें पुकारते ही रह गये।



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