Saturday, 21st October, 2017

चलते चलते

भारत-पाक का फ़ाइनल रोकने के लिये ज़ी न्यूज़ ने मिलाया नवाज़ से हाथ, बांग्लादेश को जिताने की हुई डील

15, Jun 2017 By बगुला भगत

नोएडा/इस्लामाबाद. पाकिस्तान की टीम इंग्लैंड को हराकर चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में पहुंच गयी है, जिससे फ़ाइनल में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के भिड़ने की संभावना बन गयी है। इस ख़बर से पूरे देश के क्रिकेट प्रेमी रोमांचित हो रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर, ‘देशप्रेमी’ चैनल ‘ज़ी न्यूज़’ में मातम छा गया है क्योंकि वो नहीं चाहता कि भारत, पाकिस्तान के साथ मैच खेले। इसलिये वो किसी भी क़ीमत पर इस मैच को रोकना चाहता है।

Subhash Chandra- Nawaz1
नवाज़ शरीफ़ से हाथ मिलाते डॉ. सुभाष चंद्रा

पाकिस्तान के फ़ाइनल में पहुंचते ही ज़ी न्यूज़ के मालिक डॉ. सुभाष चंद्रा ने आधी रात को अपने सिपहसालार सुधीर चौधरी और रोहित सरदाना के साथ इमरजेंसी मीटिंग की। डॉ. साब ने चौधरी और सरदाना को सिचुएशन समझाते हुए कहा कि “हमारी मजबूरी है, पिछले मैच की तरह हमें इस मैच के बायकॉट की भी अपील करनी पड़ेगी।” “अपील तो हमने पिछले मैच के बायकॉट की भी की थी सर! लेकिन लोगों ने उस अपील पे सू-सू कर दिया था…कर दिया था कि नहीं?” -सुधीर ने बीच में टोकते हुए कहा।

“बेटा ये हमारी नाक का सवाल है! अगर इस बार अपील नहीं करेंगे तो और ज़्यादा मज़ाक उड़ेगा।” -उन्होंने समझाया।

“लेकिन क्या फ़ायदा सर! कोई नहीं सुनेगा, साले सब फ़ाइनल देखेंगे।” -सरदाना ने तोल ठोकते हुए कहा। इस पर चंद्रा जी रहस्यमयी ढंग से मुस्कुराते हुए बोले, “फ़ाइटर हूँ मैं! ऐसे हार नहीं मानूंगा! तुम्हें याद है, इलेक्शन में मेरे पास कितने कम वोट थे! लेकिन फिर भी जुगाड़ करके राज्यसभा में पहुंच ही गया ना! तो साम-दाम-दंड-भेद, जो करना है, करेंगे, लेकिन इस मैच को रोकेंगे!” “लेकिन कैसे रोकें सर?” -सरदाना जी ने फिर से ताल ठोकते हुए कहा।

“इसका एक ही तरीक़ा है- भारत सेमीफ़ाइनल में आज बांग्लादेश से हार जाये।” -यह कहकर चंद्रा जी ने जेब से एक पर्ची निकालकर सुधीर को थमाई और बोले, “ये नंबर मिलाओ!” सुधीर जी ने नंबर डायल करके मोबाइल चंद्रा जी को थमा दिया। मोबाइल पर दुआ-सलाम करने के बाद चंद्रा जी बोले- “आप फ़ाइनल में भारत से बचना चाहते हो ना?” उधर से आवाज़ आयी- “जी, बिल्कुल…इंशा अल्लाह!” इस पर उन्होंने कहा “और हम भी नहीं चाहते कि हमारा-तुम्हारा मैच हो।”

“तो कैसा रहे अगर हमारी टीम आज बांग्लादेश से हार जाये! हमारी इज़्ज़त भी बच जायेगी और आपकी भी!” -चंद्रा जी बोले। उधर से काफ़ी देर तक ‘इंशा अल्लाह…इंशा अल्लाह’ की आवाज़ आती रही। “तो मिलाओ हाथ! डन!” -यह कहकर उन्होंने फ़ोन रख दिया और सुधीर-सरदाना से हँसते हुए बोले- “इसे कहते हैं एक तीर से दो निशाने!”



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