Thursday, 21st September, 2017

चलते चलते

'रिंग सेरेमनी' के प्रेजेन्टर बने रवि शास्त्री, शादी-ब्याह के लिये भी भारी मांग

07, Feb 2017 By बगुला भगत

मुंबई. टीम इंडिया के पूर्व डायरेक्टर, टेंपरेरी कोच और परमानेंट कमेंटेटर रवि शास्त्री के मल्टी-टेलेन्टेड करियर में कल एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया। शास्त्री ने बीसीसीआई के एक अधिकारी के भतीजे की ‘रिंग सेरेमनी’ का सफलतापूर्वक संचालन किया। शास्त्री का कहना है, “चूंकि मैं सिर्फ़ बीसीसीआई की ओर से ही कमेंटरी करता हूं, इसलिये जब इंडिया का मैच नहीं हो रहा होता तो मैं घर पे खाली बैठा रहता हूं। तो सोचा क्यों ना इस फ्री टाइम का कुछ सदुपयोग किया जाये!”

Ravi Shastri
रिंग सेरेमनी का संचालन करते शास्त्री जी

इस मौक़े पर शास्त्री जी ने दो-दो माइक हाथ में ले रखे थे। पूछने पर बताया कि एक माइक लड़के वालों की तरफ़ से है और एक लड़की वालों की तरफ़ से। हालांकि उनके अंदाज़ से लग रहा था कि जैसे वो कोई ‘पोस्ट मैच प्रजेन्टेशन सेरेमनी’ ही होस्ट कर रहे हैं। शुरु होते ही उन्होंने कहा- “Ladies and gentlemen, welcome to the party…” फिर उन्होंने एक-एक करके लड़का-लड़की के रिश्तेदारों का इंट्रोडक्शन कराया और उन्हें एक लाइन में खड़ा कर दिया।

दस मिनट तक चले इस ‘इंट्रोडक्शन सेशन’ के बाद शास्त्री जी लड़के को स्टेज पर बुलाते हुए बोले, “First of all, I would like to ask Mr. Harish Thakur to come up on the stage…!” फिर इतनी सुंदर लड़की को पटाने के लिये उन्होंने लड़के को ‘Carbon Kamaal Catch award’ दिया, जो लड़की वालों द्वारा लाया गया कार्बन का मोबाइल था।

इसके बाद वो बोले- “अब मैं लड़के के माता-पिता को स्टेज पर बुलाना चाहूंगा।” फिर उनसे पूछा- “क्या आपको उम्मीद थी कि सिविल इंजीनियर होने के बावजूद भी आपका लड़का इतनी अच्छी लड़की को पटा पायेगा?” लड़के के पिता ने झेंपते हुए कहा- “अजी, ये मैच तो बिचौलिये की मदद से ‘फ़िक्स’ हुआ है।”

सेरेमनी के अंत में शास्त्री जी ने लड़के को भी वैसा ही ‘परमानेंट जॉब’ मिलने की शुभकामनाएँ दीं, जैसा उन्हें ख़ुद बीसीसीआई से मिला हुआ है। उन्होंने चहकते हुए बताया कि “बीसीसीआई का कोई भी काम हो, सबसे पहले वो मुझे ही याद करते हैं।”

इसके बाद खाना-‘पीना’ शुरु हो गया। फ्री का खाना खाने पहुंचे हमारे रिपोर्टर ने जब शास्त्री जी से पूछा- “सर, आप यहां कैसे?”, तो उन्होंने चौथी गुलाब जामुन लपेटेते हुए कहा- “अरे! ये भी तो एक ‘मैच’ है…लड़के-लड़की का! और मैचों की ‘प्रेजेन्टेशन सेरेमनी’ का मुझसे ज़्यादा एक्सपीरिएंस और किसे है! ये काम तो अब मैं सोते-सोते भी कर सकता हूं।”

बाद में पता चला कि शास्त्री जी ने टैंट के पीछे जाकर हलवाई को गालियाँ सुनाते हुए कहा कि “ये कैसी पिच नान बनायी हैं। बिल्कुल फ्लैट है… मुंह में आसानी से स्विंग भी नहीं हो रही। नयी बनाओ!”



ऐसी अन्य ख़बरें