Sunday, 19th November, 2017

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कानपुर होटल स्टाफ़ से बौखलाए कीवी खिलाड़ी, कहा- "कोई कुछ बोलता ही नहीं"

29, Oct 2017 By Guest Patrakar

कानपुर. अतिथि देवो भवः। अतिथि भगवान का रूप है। यह सोच कर ही भारत में हर साल लाखों पर्यटक आते है और यहाँ से ख़ुश हो कर ही वापस जाते है। लेकिन बीते दिनो भारत दौरे के लिए आयी न्यूजीलैंड टीम कानपुर के होटल स्टाफ़ से ना ख़ुश है। ऐसा क्यूँ? आइए जानते है।

कानपुर की चित्रकारी
कानपुर की चित्रकारी

अपने तीसरे और आख़िरी वन डे के लिए न्यूजीलैंड की टीम कानपुर आयी हुई है। वैसे तो क्रिकेटर्ज़ चाहे किसी भी देश के हो उनकी देख-भाल हमेशा भव्य ही होती है। लेकिन कानपुर में शायद ऐसा ना हुआ। मैच से पहले मीडिया से बातचीत के दौरान कीवी कप्तान कैन विल्यम्सॉन ने कहा “भारत दौरा हमेशा से ही ख़ास रहता है। मैच का अंजाम चाहे कुछ भी हो हम अपना दौरा एंजोय ही करते है। लेकिन कानपुर ने हमें बहुत निराश किया। वहाँ का होटल स्टाफ़ इतना बदतमीज़ है कि कुछ भी पूछे जाने पर जवाब तक नहीं देता। हम कम्प्लेंट करने मैनेजर के पास गए तो उसने भी इशारों में बात की और बोलने से इनकार कर दिया। ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि हमें भारत में मैच के अलावा कहीं और निराश देखने को मिली हो”।

BCCI ने मामले की जाँच करते हुए तीन होटल स्टाफ़ तथा मैनेजर को बाहर निकलवाने की माँग की है। फेकिंग न्यूज़ संवादाता ने उनमें से एक से बातचीत की। होटल में लॉंड्री का काम करने वाले उमा शंकर ने फेकिंग न्यूज़ से पहले तो बात चित करने के लिए अपना गुटख़ा थूकने से मना कर दिया। लेकिन संवादाता द्वारा बहुत मिन्नते करने तथा नया गुटखा दिलाने का आश्वासन देने पर ही अपना मौन व्रत तोड़ा। उमा ने बताया “ए साला गोरी चमड़ी के जन हमारे देश में हार ज़ाते है इसीलिए हम जैसे छोटे लोगों पर ग़ुस्सा करते है। इ का चाहते है कि इनकी दो रुपए की बात का जवाब देने के लिए हम अपना पाँच रुपए का गुटख़ा थूक दे? मार के एक कँटाप कपाल ना सुज़ायी दे ससुर का”?

वैसे ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब खिलाड़ियों को कानपुर में परेशानी का आयी हो। इस से पहले भी एक बार ऑस्ट्रेलिया टीम ग्राउंड प्रैक्टिस कर रही थी तब मैदान में इतना गुटख़ा पड़ा था कि वाइट गेंद लाल हो गयी थी। और एक दिवसीय मैच को बदल कर टेस्ट मैच करना पड़ा।

फ़िलहाल होटल स्टाफ़ ने BCCI और कीवी खिलाड़ियों से लिखित में माफ़ी माँग ली है। और आगे भी उनसे लिखित में ही बात करने का आग्रह किया है। क्यूँकी यह कानपुर है भैया, यहाँ लड़का साँस छोड़ सकता है लेकिन मुँह में दबा गुटख़ा नहीं।



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