Saturday, 21st October, 2017

चलते चलते

Transcript: भारत से हार के बाद पाकिस्तानी ड्रेसिंग रूम में हुई मीटिंग का विवरण

05, Jun 2017 By Sandeep Kadian

भारत से हार के बाद पाकिस्तानी खेमे में निराशा का माहौल था, सभी खिलाड़ी हार का जिम्मा एक दूसरे पर डालने में व्यस्त थे. इस बीच उनमें क्या क्या बात हुई, हमने अपने ख़ुफ़िया कैमरे से रेकॉर्ड कर ली. आइए पढ़ें उसी बातचीत के कुछ अंश Pakistan-squad

सरफ़राज़- लानत है भाई लानत, इतना गंदा खेले, इतना गंदा

शादाब ख़ान- सरफ़राज़ भाई बॉल तो अच्छी डाली थी, कोई कैच ही नहीं पकड़ता

मोहम्मद आमिर- अभी नया नया टीम में आया है तो हैरान हो रहा है, आदत डाल ले छोटे

शहज़ाद- दो तीन कैच तो छूट ही जाते हैं, उनका नाम ले कर अपनी गंदी बोलिंग मत छुपाओ, तीन तीन बॉलर मिल कर एक ओवर पूरा कर रहे, फिर भी छक्के खा रहे

मलिक- शहज़ाद, तू जा और सेल्फी ले, तेरे बस का वही है, खुद पाजामे का नाड़ा बाँधना नहीं आता, दूसरों को नसीहत दे रहा है

शहज़ाद– चाचा तुमने दो चौके मार दिए तो ज़्यादा मत उछलो, किया आपने भी कुछ नहीं, खड़े खड़े रन आउट हो गए

मलिक- मैं खड़ा रहता ना तो जिता ही देता

हफ़ीज़- तू खड़ा रहता ना तो आउट ही नहीं होता, पिच पर घूम रहा है सीधा जडेजा को बॉल दे कर

सरफ़राज़- ओ मेरे बुज़ुर्गो, तुम्हारी उम्र के लोग पेंशन ले रहे हैं और तुम बच्चों जैसे लड़ रहे हो

हफ़ीज़- कप्तान साब रुक जाओ, हमारा मुँह मत खुलवाओ, मैच के शुरू में स्पिन्नर को बॉल देनी थी तो ये फास्ट बॉलर्स की फौज हमने यहाँ भैंस का दूध निकालने के लिए रखी है

अज़हर अली- चलो छोड़ो यार, अगले मैच में क्या करना है, वो सोचो

सरफ़राज़- क्या करना है यार, इंडिया से हार गए, आधा टूरनामेंट तो यहीं ख़त्म हो गया

शादाब ख़ान- हम बाकी सारे मैच जीत कर इंडिया को फिर फाइनल में हरा सकते हैं

(सभी खिलाड़ी ज़ोर ज़ोर से हँसने लग जाते हैं)

सरफ़राज़- ये नये लड़के भी ना.. 1992 का वर्ल्ड कप देख देख के बड़े होते हैं, और फिर हर जगह वैसी ही बात करते रहते हैं. चलो भाई, रात बहुत हो गई

(और फिर सभी खिलाड़ी अपने अपने कमरे में चले जाते हैं)



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