Sunday, 20th August, 2017

चलते चलते

अपने दोस्त से मिलने उसके घर गया युवक, 'ना ना' कहते हुए भी चार प्लेट समोसे खा गया

17, Aug 2016 By Ritesh Sinha

फ़रीदाबाद. बहुत दिनों बाद विप्लव जैन अपने दोस्त सूरज के घर उससे मिलने पहुंचा। सूरज अपने दोस्त को देखकर खुश हो गया, उसे अन्दर बुलाया और दोनों दोस्त बैठकर इधर-उधर की बातें करने लगे। इतने में सूरज ने अपनी पत्नी संगीता से कहा कि “हमारा दोस्त आया है भई, कुछ नाश्ता वगैरह लाओ!” ये सुनकर विप्लव ने औपचारिकता में कहा “नहीं भाभी जी, आप तकलीफ मत कीजिए मैं नाश्ता नहीं करूँगा।” जब उन्होंने ज़्यादा ज़िद की तो वो बोला- “अच्छा चलो, आधा कप चाय पी लूंगा।”

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विप्लव का शिकार बनी समोसों की पहली प्लेट

थोड़ी देर बाद विप्लव ने देखा कि उसके मना करने के बावजूद संगीता जी चाय के साथ प्लेट में समोसे भी ले आयीं। गरमा-गरम समोसे और चटनी देखकर विप्लव के मुंह में पानी आ गया। पहला समोसा उसने झिझकते हुए खाया। “और ले ना … शरमा मत, अपना ही घर समझ!” सूरज ने एक और समोसा पकड़ाते हुए कहा। “नहीं..नहीं बस हो गया, इतना काफी है।” -विप्लव ने शर्माते हुए जवाब दिया।

“लीजिए ना भाई साब.. आपने तो कुछ खाया ही नहीं है!” सूरज की बीवी ने कहा। इतना कहने की देर थी कि विप्लव समोसों पर टूट पड़ा। सूरज अभी अपने पहले समोसे में ही फूंक मार रहा था, तब तक विप्लव चार समोसे पेट के हवाले कर चुका था। चौथा समोसा आते आते विप्लव ने अपनी पैंट को ढीला भी कर लिया। विप्लव समोसे की प्लेट को भी बेदर्दी से दबा-दबा कर चटनी खा रहा था। उसकी स्पीड देखकर सूरज को चिंता होने लगी कि कहीं ये प्लेट भी ना खा जाए। उसने उसे रोका- “प्लेट को छोड़ दो, प्लेट खाने की चीज़ नहीं है।” “हाँ-हाँ बिलकुल” अपना आखिरी समोसा दबाते हुए विप्लव ने कहा।

सारी प्लेट को ठिकाने लगाने के बाद विप्लव ने एक लंबी डकार ली और कहा, “अब मैं चलता हूँ, समोसों के चक्कर में बहुत देर हो गई!” उसके जाते ही सूरज और संगीता में झगड़ा शुरु हो गया कि समोसे बनाने को सबसे पहले किसने कहा था।



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