Saturday, 23rd September, 2017

चलते चलते

रात की बची हुई दाल और सब्ज़ियों से महिला ने लगा दिया पति को 'छप्पन भोग'

11, Sep 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. भारतीय पुराणों में कहा गया है कि देवताओं को ख़ुश करने के लिये छप्पन भोग लगाया जाता है। लेकिन एक महिला ने कल रात जब अपने पति को छप्पन भोग लगाया तो वो ख़ुश होने के बजाय नाराज़ हो गया। यह ह्रदय-विदारक घटना मयूर विहार में रहने वाले मिश्रा दंपति के घर पे हुई।

husband-wife fight
दो दिन पुरानी दाल की शिकायत करता मयंक

हुआ यूँ कि मयूर विहार के फ़ेज-1 में रहने वाली रुचि मिश्रा की रुचि ज़रूरत से ज़्यादा दाल-सब्ज़ी बनाने और फिर उन्हें दो दिन बाद तक परोसने में है। अगर कटोरी में दो चम्मच सब्ज़ी भी बच जाती है, तो वो उसे फेंकने के बजाय संभालकर फ्रिज में रख देती है। उनकी इस आदत की वजह से उनके फ्रिज में कभी-कभी प्राचीनकालीन सब्ज़ियाँ भी मिल जाती हैं।

पिछले हफ़्ते जब मयंक ने एक ताज़ी सब्ज़ी की तरफ़ हाथ बढ़ाया तो रुचि ने उसके हाथ को वहीं रोक दिया और दूसरी कटोरी बढ़ाते हुए बोली- “पहले इसे फ़िनिश करो! ये कल रात वाली दाल है, बाद में ख़राब हो जायेगी!”

“लेकिन मैं…” -मयंक ने कुछ कहना चाहा लेकिन रुचि ने उसके ऑब्जेक्शन को रिजेक्ट कर दिया और कहा- “अरे बाबा! ये तो अभी बनी है, इसे तो रात में भी खा सकते हो ना!” और इस तरह मयंक को फिर से बासी सब्ज़ी खानी पड़ती है। पुरानी वाली को ‘फ़िनिश’ करने के चक्कर में उसे ताज़ा माल चखे अरसा हो गया है।

अब, चार दिन पहले उनके बेटे आशु का जन्मदिन था, तो इस वजह से घर में कुछ एक्स्ट्रा चीज़ें भी बन गयी थीं, जो रुचि की मेहरबानी से अभी तक चलन में थीं। कल रात जब उसने खाना लगाया तो पूरी मेज़ भर गयी और सब्ज़ियों की संख्या 56 के आस-पास ही हो गयी, जिनमें से कुछेक तो एक हफ़्ते पुरानी थीं। मयंक को उनमें से टिंडे की सब्ज़ी कुछ जानी-पहचानी सी लगी तो उसने कहा- “ये तो ख़राब हो गयी है शायद। सूँघकर देखो!” रुचि ने कटोरी उठाई और सूँघकर कंधे उचकाते हुए बोली- “मुझे तो कोई स्मैल नहीं आ रही!”

यह सुनकर मयंक के सब्र का बाँध टूट गया और वो चिल्ला उठा- “तुम्हारी सारी बासी सब्ज़ियों को ‘फ़िनिश’ करने का ठेका ले रखा है क्या मैंने?” इसके बाद दोनों में जमकर जूतम-पैजार हुई। “मैं कोर्ट केस करुंगा तुम पे, घरेलू हिंसा का!” -मयंक ने धमकी दी तो रुचि भी मेज पर मुक्का मारते हुए बोली, “हाँ तो मैं क्या डरती हूँ तुम्हारी कोर्ट-कचहरी से!”

यह कहते हुए उसने सारी सब्ज़ियों को उठाकर वापस फ्रिज में रख दिया, कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश करने के लिये! अब कोर्ट ही तय करेगा कि ये सब्ज़ियाँ खाने लायक थीं या नहीं। वैसे, पता नहीं है कि केस की सुनवाई तक ये सब्ज़ियाँ अपने मूल रूप में बची भी रहेंगी या नहीं!



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