Saturday, 19th August, 2017

चलते चलते

दस साल के बच्चे ने घर का सारा सामान नये घर में कर दिया शिफ्ट, स्कूल बैग ढोने का था अनुभव

20, Sep 2016 By Ritesh Sinha

नोएडा. बीस साल तक पाई-पाई जोड़ने के बाद आखिरकार सदाबहार मिश्रा जी ने अपने लिए एक नया घर खरीद ही लिया। घर तो खरीद लिया लेकिन उससे बड़ी टेंशन घर के सामान को नये घर में शिफ़्ट करने की थी। मिश्रा जी भी इसी वजह से परेशान थे और सोच रहे थे कि कौन से ‘पैकर्स एंड मूवर्स’ को फ़ोन करुं कि तभी मिश्रा जी के बेटे चुन्नू ने एंट्री मारी और बोला, “क्यूं टेंशन ले रहे हो पापा! ये सारा सामान तो मैं अपनी पीठ पर लादकर नए घर में शिफ्ट कर सकता हूं।” यह सुनकर मिश्रा जी हक्के-बक्के रह गये क्योंकि चुन्नू की उम्र महज दस साल है और वो पांचवीं क्लास में पढता है।

School Bags
चालीस किलो के बैग को उठाता चुन्नू

चुन्नू ने कहा, “क्या पापा आप भी! बगल में छोरा और शहर में ढिंढोरा! ये तो मेरे बाएँ हाथ का खेल है। इससे ज्यादा वजन तो मेरे स्कूल बैग में है, जिसे मैं रोज़ ढोकर स्कूल तक ले जाता हूँ। आप फालतू में पैसे खर्च मत कीजिए! आप बस आराम करो! जस्ट चिल्ल पापा!” यह कहकर चुन्नू अपने काम में भिड़ गया और सुई से लेकर रेफ्रीजरेटर तक सारा सामान अपनी पीठ पर लादकर नए घर में पहुंचा दिया। बड़े-बड़े बर्तन चुन्नू अपनी पीठ पर ऐसे लादकर ले जा रहा था मानो वे उसके लिए गुब्बारे हों। देखते ही देखते उसने घर का सारा सामान अपने नए घर में पहुंचा दिया। काम ख़त्म होते ही मिश्रा जी उसे पुचकारते हुए बोले, “बेटा! कंधे में दर्द तो नहीं हो रहा?” तो चुन्नू भड़क गया और बोला “क्या पापा आप भी बच्चों जैसी बातें करते हो। लगता है आप कभी स्कूल गये ही नहीं, पैसे देकर ही पास होते थे शायद!”

चुन्नू के इस कारनामे पर जब आस-पड़ोस के लोग बधाई देने पहुंचे तो मिश्रा जी ने कहा, “आज मुझे अपने बेटे पर गर्व है। लेकिन इसका आधा श्रेय चुन्नू के स्कूल वालों को भी जाता है जिन्होंने मेरे बेटे को मनरेगा मजदूर बनाने के लिए जी-जान से मेहनत की है।” कहते हुए मिश्रा जी का सीना चौड़ा हो गया।

इस कारनामे के बाद चुन्नू हीरो बन गया है। चुन्नू के स्कूल ने चुन्नू को ‘पैकर्स एंड मूवर्स’ केटेगरी में “बेस्ट स्टूडेंट” का अवार्ड देने की घोषणा कर दी है। उधर, चुन्नू का विरोध भी शुरू हो गया है। मनरेगा मजदूर संगठन ने चुन्नू के पापा और स्कूल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि ये सब उनकी रोजी रोटी छीनने की साजिश है। कुछ पैकर्स एंड मूवर्स कंपनियां भी इन मजदूरों का समर्थन कर रही हैं।



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