Saturday, 21st October, 2017

चलते चलते

2000 के नोट के खुले ना होने पर दुकानदार ने पकड़ाईं 1800 चॉकलेट्स, बोरी में भरकर ले गया युवक

14, Nov 2016 By bapuji

नयी दिल्ली. आपके साथ भी कई बार ऐसा हुआ होगा, जब दुकानदार ने बचे हुए पैसे लौटाने के बजाय आपको टॉफ़ी या कुछ और दे दिया होगा और आपने भी मन मारकर वो रख लिया होगा। वैसे देखें तो इसमें सबका फ़ायदा होता है- दुकानदार की टॉफ़ी और चॉकलेट्स बिक जाती हैं, जेब में सिक्कों की जगह टॉफ़ी होने से छन-छन की आवाज़ नहीं आती और घर के छोटे बच्चों का भी भला हो जाता है।

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मोंटी के बोरे में भरी टॉफ़ियां और चॉकलेट

लेकिन खुले पैसों की तंगी के चलते दिल्ली के एक कॉलेज के कैंटीन में कल एक ऐसी घटना हुई कि लोग आश्चर्यचकित रह गये। 21 वर्षीय मोंटी दिल्ली के एक कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष का छात्र है, जो रोज़ सुबह का नाश्ता कॉलेज की कैंटीन में करता है। मोंटी ने हमेशा की तरह अपना नाश्ते का ऑर्डर दिया, जो लगभग 190 रुपये का होता है। रोज़ 200 रुपये देने पर उसे बचे हुए 10 रुपयों के बदले में 10 टॉफ़ियां मिलती थीं।

कल सुबह मोंटी ने कैंटीन मालिक तबरेज़ भाई को 2000 का नया नोट पकड़ा दिया। तबरेज़ भाई ने अपना गल्ला देखा तो उसमें हमेशा की तरह खुले रुपये थे ही नहीं। मोंटी के पैसे वापस माँगने पर उन्होंने आदतन अपने चॉकलेट बॉक्स मे हाथ डाला और एक मशीन की तरह खुले पैसों की जगह चॉकलेट देना शुरू कर दिया। इस बीच जब मोंटी का ध्यान उधर गया तब तक तबरेज़ भाई 1500 चॉकलेट निकाल चुके थे और पूरे काउंटर पर और उसके आस-पास चॉकलेट बिखरी पड़ी थी।

दुकानदार ने माना कि खुले ना होना, व्यस्तता और रोज की आदत होने की वजह से उससे ये ग़लती हो गई। बहरहाल, अब चॉकलेट को वापस अंदर रखना संभव नहीं था। इसी बीच एक जानकार और ज्ञानी आदमी ने कहा कि “डब्बे से निकली टॉफी, पैकेट से निकले कुरकुरे और शैशे से निकले शैम्पू को वापस अंदर नही डालना चाहिए, अपशकुन होता है!” मजबूर होकर मोंटी ने चॉकलेट की गिनती शुरू की और पूरी 1810 चॉकलेट्स को बोरी में भरकर अपने घर ले गया। गुप्त सूत्रों से पता चला है कि मोंटी की कई महिला मित्र हैं और गंभीर रूप से ‘फ़्रेंड जोन’ में पड़े होने के कारण मोंटी इन सभी चॉकलेट्स को आराम से ठिकाने लगा सकता है।



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