Friday, 20th October, 2017

चलते चलते

दिवाली पर रावण का गुणगान करने वाले असमंजस में, क्रिसमस पर किसका करें गुणगान

25, Dec 2016 By Pagla Ghoda

दिल्ली: खुद को “Masses” यानी के आम जनसाधारण से अलग बताने वाले इंटेलेक्चुअल प्रकार के जीव अक्सर खुद को “Differentiate” करने के मौके तलाशते रहते हैं। यह कदाचित वही लोग हैं, जो दीपावली पर रावण के गुणगान करते हैं और भारत-पाक मैच में अफरीदी के जीरो पर आउट हो जाने पर भी “Well Tried” जैसे वाक्यांशों का इस्तेमाल कर शाब्बाशी देते हैं। लेकिन ऐसे लोग आज क्रिसमिस के मौके पर काफी परेशान बैठे हैं क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि दिवाली पर तो रावण के गुणगान कर लिए, पर क्रिसमस पर किसके करें?

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क्रिसमस पर असमंजस में पड़े दीपेश दस्तवाला

प्रीत विहार के रहने वाले दीपेश दस्तवाला जिन्होंने इस दिवाली पर “रावण जैसे महात्मा के दस गुण” जैसे ब्लॉग लिखकर फेसबुक पर ज़बरदस्त वाहवाही लूटी थी, अपने कंप्यूटर पर एक खाली वर्डपैड खोल के बैठे थे पर उनकी उँगलियाँ चल नहीं रहीं थी। उन्होंने बताया, “यार ये क्रिसमस में कौन विलेन होता है? एक घंटे से कुछ लिखने को हाथ खुजा रहा है पर कुछ मिल ही नहीं रहा गूगल पे। महाभारत की बात आती है तो मैं दुर्योधन की तारीफों के पुल बाँध देता हूँ, रामायण हो तो रावण और कुम्भकर्ण मेरे मनपसंद हैं। पर क्रिसमस पर साला कोई विलेन ही नहीं पता चल रहा। यीशु मसीह को बरगलाने तो शैतान स्वयं आया था। पर वो तो बहुत बड़े ग्रेड का विलेन है, कोई आदमज़ाद विलेन नहीं है क्या पूरी स्टोरी में? उनको क्रूसीफिक्स पर चढाने वाले भी सब चावड़ी बाजार टाइप एक्स्ट्रा ही थे।” गुस्से में आकर आखिरकार दीपेश ने अपना लैपटॉप “ठा” बंद कर दिया।

कलकत्ता की जानी मानी लेखिका सुष्मिता शोभान्डे, जो रावण की काफी बड़ी फैन हैं और “शूर्पणखा के आंसू” नामक एक पुस्तक भी लिख रही हैं, वो भी आज खासी परेशान हैं। आमतौर पर तो वो अपने मैकबुक एयर लैपटॉप पर ही लिखती हैं, परंतु जब फेकिंग न्यूज़ टीम उनसे बात करने गयी तो उन्होंने “फील” लाने के लिए अपना पुराना टाइपराइटर निकाल लिया। अपनी आखों पर लगा मोटा चश्मा उन्होंने माथे पर चढ़ाते हुए कहा, “आप जानते ही हैं कि शूर्पणखा मेरे लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं। मेरे हिसाब से वो दुनिया के सबसे पहली फेमिनिस्ट हैं और उनके पिता समान भाई लंकाधिपति तो एक अतुल्य उदहारण हैं उदारता एवं विशाल ह्रदय का। तो उन सब विषयों पर तो मैं काफी लिख चुकी हूँ। पर आज के त्यौहार पर कुछ भी “differentiated” लिख पाना बहुत कठिन है। और वैसे भी मुझे हिन्दू धर्म के अलावा किसी और चीज़ के बारे में लिखने में काफी डर ही लगता है। चार्ली हेब्दो के हाल आप देख ही चुके हैं।”

ग्रीन टी विद लेमन पीते हुए सुष्मिता जी ने कहा, “अब तो इंतज़ार है अगले साल लोहड़ी के त्यौहार का, जब मैं होलिका दहन पर “होलिका का मासूम त्याग” नामक एक लंबी कविता लिखूंगी। उसे ट्रांसलेट करके अमेरिका और यूरोप के भी कई बड़े अखबारों में छपवाया जायेगा।”



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