Wednesday, 26th April, 2017
चलते चलते

सिगरेट पैकेट के काले फेफड़े की तरह मक्खन के पैकेट पर 'बढ़ी हुई तोंद' की तस्वीर लगाई जाएगी

22, Nov 2016 By Pagla Ghoda

लुधियाना. काले धन पर होने वाली सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में तो सिवाय आलिया भट के देश का बच्चा-बच्चा जानता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ऐसी ही स्ट्राइक अब खाद्य पदार्थों पर भी होने वाली है। सिगरेट के पैकेट पे छपे फेफड़े के फ़ोटो की तरह अब मक्खन, घी और अत्यधिक वसा युक्त पदार्थों पर अब एक मोटी तोंद की तस्वीर लगाई जाएगी ताकि लोग मोटापे के नुकसानों से डरें। हमारे संवाददाता ने पूरे लुधियाना शहर में घूम-घूम कर इस मुद्दे पर लोगों से बात की।

Pot Belly 2
अपनी तोंद का साइज़ पता करते परमिंदर जी

‘सुपरस्टार टर्मिनेटर’ ढाबा के मालिक परमिंदर भाटिया सरकार के इस फैसले से काफी सकते में हैं। अपनी मोटी तोंद पे हाथ फिराते हुए उन्होंने कहा, “ओ पाजी, हमारे ढाब्बे की तो मक्खन वाली दाल बोत मशहूर है। दूर-दूर से अमरीका इंग्लैंड से भी जो लोक्की यहाँ अपने पिंड में आते हैं, वो हमारे ढाब्बे की मक्खन वाली दाल तो ज़रूर खाके जाते हैं। इसीलिए हमने अपने ढाब्बे के मेन काउंटर पे सौ बड़े-बड़े मक्खन के पैकेट सजाये हुए हैं। बड़ी फील आती है जी इससे! हुण तुस्सी पैकटों पे तोंद दियां फोटुएं लगा देयोगे ते साड्डा ते धंधा ही बांद पै जाना है जी!”

चुलबुल पांडे के भाई मख्खनचंद पांडे उर्फ़ मक्खी, जो आजकल लुधियाना में ही एक ढाबा चलाते हैं, उन्होंने भी अपनी नाराज़गी जताते हुए कहा, “यार, हम तो यहाँ आके बसे ही इसलिए थे क्योंकि यहाँ कोई हमें मक्खी नाम से नहीं पुकारता। यहाँ लोगों को मक्खन कहना इतना पसंद है कि लोग साले हमें भी मख्खन ही बुलाने लगे। बड़ा प्राइड-प्राइड सा फील होता है जी सुन के! “मख्खन दा ढाबा” नाम से ही हमारी महीने में लाखों की बिक्री हो जाती है। लेकिन अब यार सरकार ऐसे मक्खन को “मोटी तोंद” से जोड़ देगी तो यार हमारा तो नाम ही ख़राब हो जायेगा ना!”

“जवानों दा पट्ठा” अखाड़े के मालिक तेली सिंह लंगोठ ने भी सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की है। अपने एक पट्ठे को पटखनी देते हुए तेली सिंह जी ने कहा, “भाईसाबजी जब सुलतान मूवी आयी ना, तो हमें भी लगा कि अब देस में पहलवानी पे थोड़ा और ज़ोर आएगा। नए-नए पठ्ठों की भर्ती भी होने लगी दनादन। लेकिन अब किसी ने बॉडी-शौडी बनानी है तो मख्खन-शक्खन तो खाना ही पड़ेगा ना। वैसे तो हम भी फलाहार करने को कहते हैं, शाम के टैम पे। पर सुबह-सुबह थोड़ा दूध मक्खन खाना तो जरूरी है पठ्ठों के लिए। अब हम नी चाहत्ते कि ये तोंद-तूंद की फोटो देख के हमारे युवा पहलवान कुछ ज़्यादा ही हेल्थ कॉन्ससियस हो जावें, के पूरा ही घास फूस खानी सुरु कर देवें। नहीं तो अगले नैशनल दंगल में तो “होरी का अखाड़ा” ही बाजी मार ले जावेगा। ते जे मैं होने नी दूंगा!”

जहाँ सरकार के इस कदम से ढाबा मालिकों और पहलवानों में डर का माहौल है वहीं, “साइज जीरो” और “हेल्थ इज वेल्थ” वाले फेसबुक पेजेज को लाइक करने वालों ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। मक्खन पैकेट पे मोटी तोंद के साथ-साथ चॉकलेट पैकेट पे ख़राब दांत, दारु बोत्तल पे सड़ा हुआ लीवर और स्मार्टफोन पैकेट पे ख़राब दिमाग की तस्वीरें डालने की भी मांग की जा रही है।



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