Wednesday, 20th September, 2017

चलते चलते

आइसक्रीम की दुकानों को भी सड़क किनारे से हटा दीजिए, 'मम्मी-पापा संघ' की सुप्रीम कोर्ट से गुहार

06, Apr 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल और स्टेट हाइवे के 500 मीटर के दायरे में आने वाली वाइन शॉप्स को एक अप्रैल से बंद करने का आदेश दिया है। हालाँकि, इस आदेश का जमकर विरोध भी हो रहा है, लेकिन अपने बच्चों की जिद से परेशान पैरेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट से इस लिस्ट में आइस-क्रीम को भी जोड़ने की गुहार लगाई है।

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बच्चे को रोने के लिये उकसाता आइसक्रीम विक्रेता

‘भारतीय मम्मी-पापा संघ’ (BMPS) की मांग है कि सड़क किनारे जितनी भी आइसक्रीम की दुकानें हैं उनको जड़ सहित उखाड़कर कम से कम एक किलोमीटर दूर फेंक दिया जाए, क्योंकि जब भी बच्चे सड़क किनारे आइसक्रीम बिकता हुआ देखते हैं तो वे आइसक्रीम खाने की जिद करने लगते हैं और अगर मना करो तो मुंह फुलाकर बैठ जाते हैं। गर्मी आते ही पूरे देश में बच्चे आजकल एक ही काम कर रहे हैं, और वो है- आइसक्रीम खाना!

मयूर विहार की रहने वाली अनुराधा बिष्ट ने अपना दुखड़ा रोते हुए कहा कि “क्या बताऊँ भाईसाब! जब से गर्मी लगी है ना! बच्चे दिन भर आइसक्रीम के पीछे भाग रहे हैं। मना करो तो इनका मुंह फूलकर पांच किलो का हो जाता है। मैं तो कहती हूँ, सुप्रीम कोर्ट को हमारी भी कुछ सुननी चाहिए। जैसे शराब की दुकान बंद करा दी हैं ना वैसे ही इन आइसक्रीम वालों को भी सड़क से हटा देना चाहिए। ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी। हाँ!”

वहीं, कामिनी जी की पड़ोसन साधना मैडम ने एक किस्सा सुनाया कि “कल मैं टिंकू के साथ सब्जी-भाजी खरीदने बाज़ार गई थी। वहां पता नहीं कहाँ से इसने आइसक्रीम देख लिया और खरीदने के लिए जिद करने लगा। मैंने मना किया तो वहीं सड़क पर बैठ गया और हाथ-पैर पटकने लगा। क्या करती! मजबूरी में दिलानी पड़ी। ये हालत हो गई है हमारी भाईसाब! हमें तो अब सुप्रीम कोर्ट का ही सहारा है।”

उधर, बच्चों ने अपने पैरेंट्स की इस मांग का विरोध करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि गर्मियों में ‘गोले’ खाना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है और ये अधिकार उनसे कोई नहीं छीन सकता। उन्होंने यह भी धमकी दी है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने आइसक्रीम की दुकानों को बंद कराया तो वे सुप्रीम कोर्ट को ही बंद करा देंगे।



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