Saturday, 29th April, 2017
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नर्सरी में बेटे के एडमिशन की खुशी में दंपति बेहोश, परिजनों ने स्कूल में तोड़ फोड़ की

02, Mar 2014 By बगुला भगत

Protests
तोड़ फोड़

दिल्ली के मयूर विहार में नर्सरी में बच्चे के एडमिशन की वजह से एक बड़ा हादसा हो गया। मयूर विहार के फेज-1 में रहने वाले धनंजय मिश्रा के बेटे प्रयास का आज डीपीएस मथुरा रोड में नर्सरी में एडमिशन हुआ था। हादसे के समय धनंजय और उनकी पत्नी सुमति मिश्रा अपने घर पर ही मौजूद थे। दोपहर लगभग दो बजे उन्हें स्कूल से फ़ोन आया कि आपके बेटे का एडमिशन हो गया है। इस ख़बर को सुनते ही दोनों खुशी के मारे बेहोश हो गए। इस घटना से नाराज़ परिजनों ने डीपीएस स्कूल में जमकर तोड़ फोड़ की और प्रिंसिपल को तुरंत गिरफ़्तार करने की मांग की।

धनंजय की मां फूलमती मिश्रा ने रोते हुए बताया कि “हमें क्या पता था कि ये खुशी घर पर कहर बनकर टूट पड़ेगी।” अपने आप को संभालते हुए उन्होंने आगे बताया “बेटा और बहू चिंटी (प्रयास का घर का नाम) के लिए शहर के कई नामी-गिरामी स्कूलों में ट्राई कर रहे थे। लेकिन इस केजरीवाल की सरकार बनने के बाद दोनों बुझे-बुझे से रहने लगे थे। धनंजय कहता था कि अब तो चिंटी का एडमिशन मुश्किल है। लेकिन भगवान की किरपा से सरकार गिर गई और ये संभल गए। सरकार गिरते ही उसने अपने मौसा जी से सिफारिश करवाई और एडमिशन हो गया।”

प्रयास के दादा अखिलेश मिश्रा ने फेकिंग न्यूज़ के संवाददाता को बताया “चिंटी के पैदा होते ही हमने उसके एडमिशन की तैयारी शुरु कर दी थी। हमारे खानदान में आज तक कोई भी डीपीएस जैसे नामी-गिरामी स्कूल में भर्ती नहीं हो पाया था। इसी वजह से वे चिंटी के एडमिशन की न्यूज़ को सहन नहीं कर पाए। धनंजय रोज कहता था कि अगर एडमिशन हो गया तो एक बड़ी पार्टी अरेंज करेंगे और सब यार-रिश्तेदारों को इन्वाइट करेंगे।”

इस हादसे के बारे में फेकिंग न्यूज़ ने डीपीएस स्कूल की प्रिंसिपल सिमरन कपूर से बात की, तो उन्होंने सफ़ाई दी कि “हमने तो ऑलरेडी सभी पैरेंट्स को सजेस्ट कर रखा है कि प्लीज, एडमिशन होने पर अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल में रखें। हम पेरेंट्स के लिए साइकोलॉजिस्ट्स के स्पेशल ओरिएंटेशन प्रोग्राम्स भी कराते हैं ताकि वे आने वाली सिचुएशन को हैंडल कर सकें।” जब श्रीमति कपूर से पूछा गया कि क्या सभी पेरेंट्स के साथ बेहोश होने का ख़तरा रहता है, तो इस पर उनका कहना था कि “नहीं, सबके साथ ऐसा नहीं होता। ऐसा अक्सर उन्हीं पेरेंट्स के साथ होता है, जिनके परिवार में कभी किसी को डीपीएस जैसे रेपुटेड स्कूल में एडमिशन नहीं मिल पाता।”

अंतिम समाचार लिखे जाने तक धनंजय को होश आ चुका था और वे पार्टी के अरेंजमेंट के लिए मांगेराम हलवाई से बात कर रहे थे।

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