Wednesday, 20th September, 2017

चलते चलते

मुंबई लोकल में दूसरों के मोबाइल पर झांक-झांककर युवक ने देख डालीं 100 से ज़्यादा फ़िल्में

20, Sep 2016 By बगुला भगत

मुंबई. अगर आप अपनी झिझक को साइड में रख दें तो आप ना सिर्फ़ मुफ़्त में फ़िल्म देख सकते हैं बल्कि लाखों रुपये भी बचा सकते हैं। लोकल ट्रेन में बोरीवली से दादर तक चलने वाले एक युवक ने कुछ ऐसा ही अनोखा रास्ता अपनाया। पता चला है कि इस युवक ने पिछले 6 महीनों में दूसरे यात्रियों के मोबाइल फ़ोन में झांक-झांककर 100 से ज़्यादा फ़िल्में देख डाली हैं।

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झावेरी के मोबाइल पर फ़िल्म देखता संयम

इस युवक का नाम संयम शर्मा बताया जा रहा है, जिसे लोकल में चलने वाले अधिकांश पैसेंजर जान गये हैं। लोकल के फ़र्स्ट क्लास में सफ़र करने वाले मितेश झावेरी नाम के पैसेंजर ने संयम के बारे में बताया कि “वो हमेशा बाजू में आके खड़ा हो जायेगा और उचककर मोबाइल में झांकता रहेगा। जभी भी उससे बोलो कि ऐ भाई सीदा खड़ा हो ना! तो बोलेगा कि मैं क्या करुं, पीछे से धक्का लग रहा है।”

“दादर आते ही मैं फिलिम को पॉज कर देता हूं और उतर के अपने ऑफिस चला जाता हूं। वो भी मेरे साथ दादर पे ही उतरता है। अगली सुबह जब मैं ट्रेन में चढ़कर फिर से फिलिम चालू करता हूं, तो ये तुरंत पीछे आके खड़ा हो जाता है। कल मैंने जब ‘पिंक’ देखनी शुरु की तो बोला कि पहले वो कल वाली तो पूरी कर लो, इसे बाद में देख लेना। ऐसे बोलता है, जैसे ये उसके बाप का मोबाइल है।” -झावेरी ने ग़ुस्से से नथुने फुलाते हुए कहा।

“और भाईसाब ऐसा नहीं कि वो कोई भी फिलिम देख लेगा। पहले आजू-बाजू में देखता है कि किसके मोबाइल पे ज़्यादा अच्छी मूवी चल रही है, तब सलेक्ट करके देखता है। परसों मुझे डांटने लगा ये कैसी बकवास फ़िलिम लगा रक्खी है। कितनी बार देखोगे इसे, कोई हॉलीवुड की नयी फ़िल्म नहीं है क्या!” -झावेरी के बाजू में खड़े एक दूसरे पैसेंजर ने कहा।

संयम से तंग आकर ‘लोकल डेली पैसेंजर एसोसिएशन’ (LDPA) ने उसके ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है। लेकिन पुलिस दुविधा में है कि उसके ख़िलाफ़ केस कौन सी धारा में दर्ज करें क्योंकि कंधे के ऊपर से उचककर फिल्म देखना भारतीय दंड संहिता के तहत कोई अपराध नहीं है।

उधर, संयम को अपने इस कृत्य पर कोई शर्म या पछतावा नहीं है। उसका कहना है कि “अगर मैं मल्टीप्लेक्स में जाकर फिलिम देखूंगा तो एक फिलिम पे 700-800 का खर्चा तो पक्का समझो! अब डेढ़ सौ फ़िलिम को 800 से मल्टीप्लाई करो तो! सवा लाख रुपया बैठता है। और वैसे भी मल्टीप्लेक्स में जाने का टाइम है किसके पास!”



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