Saturday, 21st October, 2017

चलते चलते

विटामिन युक्त कुकिंग ऑयल का विज्ञापन देख माँ नें बढ़ते बच्चे को दूध छोड़ तेल पिलाना शुरू किया

06, Nov 2016 By Pagla Ghoda

मुम्बई: टेलीविज़न मार्केटिंग की इंसानी समझ यानी के कॉमन सेंस पर उस समय एक भारी विजय हो गयी जब बांद्रा की रहने वाली एक महिला श्रीमती सीमा कंकालिया ने अपने दस वर्षीया बेटे छोनू को दूध के गिलास की जगह मिनरल और विटामिन युक्त कुकिंग आयल का गिलास थमा दिया। वो तो छोनू की रोज़ाना दूध पीने की बजाये पेड़ पौधों में फेंक देने की आदत थी के उसने तेल से भरा वो गिलास भी पूरा का पूरा पेड़ पौधों में डाल दिया, वरना कोई भी अनहोनी हो सकती थी।

तेल देखकर मुँह बनाता छोनू
तेल देखकर मुँह बनाता छोनू

बाद में जब सीमा जी से इस विषय पर बात की गयी तो उन्होंने कहा, “आजकल टीवी में दिखा रहे हैं न, हार्ट को सेफ रखने वाला तेल, डायबिटीज वाला तेल, मिनरल विटामिन युक्त तेल, तो मैं भी लेके आयी एक पांच लीटर का कैन। अब छोनू दूध पीने में तो काफी नखरे दिखाता है, मुझे लगा के कम से कम तेल पीने में तो नखरे नहीं करेगा। और इसी बहाने कुछ ज़रूरी मिनरल्स और विटामिन्स ही उसके अंदर जायेंगे, जो की बढ़ते बच्चों के लिए ज़रूरी हैं। लेकिन अब उसे तेल पिलाने की कोशिश करने के लिए सब मुझे ही डांट रहे हैं। इसी बात पर मेरे ही नाम का परचा फाड़ा जा रहा है पूरे मायके और ससुराल में। जैसे के छोनू के पप्पा की कोई गलती नहीं है इसमें? वो क्यों नहीं ज़िम्मा लेते कभी भी उसे दूध पिलाने का?”

छोनू के पप्पा श्री जोगेश कंकलिया ने इस विषय पर क्रोधित होते हुए कहा, “देखिये सर ऐसा है, के कई बार ज़्यादा प्रेम भी दुखदाई हो जाता है। छोनू की मम्मी ने तेल भरा गिलास बच्चे को पकड़ा कर भारी गलती की है। उन्हें एक चम्मच से शुरू करके धीरे धीरे डोस बढ़ाना चाहिए और दो तीन महीने बाद यदि वो पूरा गिलास भी पिला देतीं तो बच्चा पी लेता आराम से। लेकिन नहीं जी हम तो एकदम से ठूस देंगे बच्चे में विटामिन और फाइबर इत्यादि। ये भी कोई तरीक़ा हुआ?”

छोनू के ताऊजी और श्री जोगेश के बड़े भाई जगजीवन कंकलिया ने इस विषय पर अंतिम टिपण्णी दी, उन्होंने कहा, “आजकल के बिग्यापन देख कर माँ बाप का तो दिमाग ही ख़राब हो गया है। कोई कहता है टूथपेस्ट में नमक, कोई कहता है नीम, कल को आम का अचार भी डलवा देंगे टूथपेस्ट में। अब उस दिन टीवी पे दिखा रहे थे के बिना चॉकलेट पाउडर डाले दूध का कैल्शियम बर्बाद हो जाता है। अरे बावड़ों इतने हज़ारों सालों से लाखों जन मानुस बिना पाउडर डाले जो दूध पीता आ रहा है उन सभी को कभी दूध से कैल्शियम मिला ही नहीं? धन्य है आजकल की रिसर्च और उसपे बने धुँआधार बिज्ञापन।



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