Thursday, 19th January, 2017
चलते चलते

"मेली बुआ की छादी में जलूल जलूल आना" –ढाई महीने के बच्चे ने लोगों को निमंत्रण भेजा

24, Nov 2015 By बगुला भगत

मैनपुरी. रामअवध यादव के घर में एक साल बाद फिर चमत्कार हो गया! घर में शादी आयी और शादी आते ही उनका ढाई महीने का पोता लवी अचानक बोल पड़ा। उनके यहां ऐसे शुभ अवसरों पर ऐसे चमत्कार अक्सर होते रहते हैं।

स्पेशल रिक्वेस्ट करने वाले जनाब लवी. मुस्कुरा तो इतने कॉन्फिडेन्स से रहे है जैसे सारी शादी किी तैयारियाँ इन्हों ने ही की हो!
स्पेशल रिक्वेस्ट करने वाले जनाब लवी. मुस्कुरा तो इतने कॉन्फिडेन्स से रहे है जैसे सारी शादी किी तैयारियाँ इन्हों ने ही की हो!

अगले शुक्रवार को उनकी सबसे छोटी बेटी आरती की शादी है। शादी के लिये बड़ा सुंदर कार्ड छपवाया गया है, जिसमें आरती के ढाई महीने के भतीजे लवी ने अपनी ओर से ज़िद करके छपवाया है- “मेली बुआ की छादी में जलूल जलूल आना!”

वैसे तो दर्शनाभिलाषियों की लिस्ट में पूरे दो दर्जन नाम लिखे हुए हैं, लेकिन परिवार को सबसे ज़्यादा उम्मीद इस ढाई महीने के बच्चे से ही है। उन्हें भरोसा है कि हमारे यार-रिश्तेदार किसी और की बात मानें ना मानें, लेकिन लवी की बात ज़रूर मानेंगे।

पिछले साल भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब रामअवध के छोटे बेटे मुकेश की शादी थी। तब इनके बड़े बेटे राकेश के चार महीने के लाडले प्रिंस ने अपने चाचू की शादी में आने के लिये इसी तरह रिक्वेस्ट की थी। रिक्वेस्ट का असर ऐसा हुआ कि शादी में तीन सौ की जगह पांच सौ लोग आ गये और गुलाब जामुन और आइसक्रीम बारात के आने से पहले ही ख़त्म हो गये!

वही प्रिंस अब चौदह महीने का हो चुका है, लेकिन अभी ढंग से पापा बोलना भी नहीं सीखा। जब किसी रिश्तेदार ने पूछ लिया कि “पिछले साल तो ये चार महीने का ही बोल रहा था, अब क्या हो गया इसे?”

तो प्रिंस की मम्मी पूजा ने शर्माते हुए कहा, “आप नये हैं ना! इसलिये आपके सामने शरमा रहा है।”

यह सुनकर उनके पड़ोसी वर्मा जी उस रिश्तेदार को साइड में ले गये और धीरे से बोले, “बच्चा-वच्चा कोई नहीं बोलता! ये कार्ड में सब अपनी तरफ़ से लिखवाते हैं। इन्हें लगता है कि लोग बच्चे की बात को टालेंगे नहीं और शादी में कन्यादान करने ज़रूर आयेंगे।”

“पिछले साल इनके मुकेश शादी हुई थी, तब इनके चार महीने के पोते प्रिंस ने कहा था- ‘मेले चाचू की छादी में जलूल जलूल आना!’ और शादी में इन्वाइट करने वाले प्रिंस महाराज ख़ुद सारी शादी में सोते रहे। दिन में सुलाया नहीं था ना उसे!” -वर्मा जी ने हंसते हुए कहा।



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