Sunday, 17th December, 2017

चलते चलते

नोटबंदी से मालिक हुआ ग़रीब तो ड्राईवर के भी तेवर बदले, अब दिन में एक बार ही ठोंक रहा है सलाम

20, Nov 2016 By Ritesh Sinha

मुंबई. नोटबंदी का असर अब लोगों के आपसी संबंधों पर भी पड़ता दिखायी दे रहा है। श्यामू नाम का ड्राईवर पिछले दस साल से शहर के मशहूर बिल्डर मि. लालवानी की गाड़ी चला रहा है। कुछ दिन पहले तक श्यामू अपने मालिक को सलाम ठोंकने में कोई कमी नहीं करता था और दिन में कम से कम दस-बारह बार तो ऐसा करता ही था। बदले में मि. लालवानी भी श्यामू को हर बार कुछ ना कुछ ‘टिप’ दे दिया करते थे।

Driver
मिस्टर लालवानी को सलाम ठोंकता श्यामू

लेकिन नोटबंदी के बाद सब कुछ बदल गया। नोटबंदी का एलान होने के बाद मि. लालवानी को अपना बहुत सारा कैश घर के पिछवाड़े ले जाकर जलाना पड़ा। श्यामू ने खुद अपने शुभ हाथों से 500 और 1000 के नोटों की गड्डियों को आग के हवाले किया। इस ‘नोट-दहन’ की वजह से श्यामू को अपने मालिक की काली कमाई का भी पता चल गया और ‘राजा’ से ‘रंक’ होने का भी।

जैसे ही मि. लालवानी के पास पैसे की कमी हुई तो श्यामू ने भी अपना रंग बदलना शुरू कर दिया है। वह ड्यूटी पर लेट आने लगा है और उसके सुनने की क्षमता में भी भारी कमी आ गई है। मि. लालवानी जब तक तीन बार ना चिल्लाएं, तब तक श्यामू को सुनाई ही नहीं देता। यहाँ तक कि श्यामू ने अपने मालिक से कह दिया है कि अब वह दिन में सिर्फ एक बार सलामी ठोंकेगा, इससे ज्यादा नहीं!

कम सलामी ठोंकने वालों में श्यामू अकेला नहीं है बल्कि रसोईया, सिक्योरिटी गार्ड, दूधवाला और काम वाली बाई की सलामियों में भी भारी कमी दर्ज की गई है। फ़ेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए श्यामू ने बताया कि “देखिए! पहले जब साबजी मुझसे सिगरेट मंगवाते थे तो सीधे सौ का नोट देते थे। मैं साबजी के लिए बीस रुपये की सिगरेट लाता और बाकी के रुपये अपनी जेब में रख लेता था। साबजी छुट्टे पैसे नहीं मांगते थे, इसलिये हमें भी सलामी ठोंकने में मज़ा आता था। अब साबजी दांत से गिन-गिनकर पैसे दे रहे हैं, तो हम भी गिन-गिनकर सलाम कर रहे हैं।”- कहते हुए श्यामू मुस्कुराने लगा।



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