Sunday, 22nd April, 2018

चलते चलते

मारवाड़ी लड़के ने होटल से नहीं उठाया बचा हुआ साबुन-शैंपू, पिताजी ने गल्ले पर बैठने से किया मना

25, Mar 2018 By sameer mahawar

जयपुर. परिवार के संग छुट्टियां मनाने गए अंकित अग्रवाल को अपनी ईमानदारी बहुत ही भारी पड़ी, जब वो होटल से चेक-आउट के टाइम बचा हुआ शैंपू और साबुन वहीं पर छोड़ आया।

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दुकान के बाहर खड़ा संजय

अंकित, जो अपने पिताजी के संग एक किराने की दुकान संभालता है, अब शायद उस दुकान के गल्ले पर कभी बैठा हुआ नहीं दिखाई देगा क्योंंकि उनके पिताजी के अनुसार उसने ना केवल पैसों का नुक़सान किया है, बल्कि पूरे मारवाड़ी समाज की इज्ज़त को भी भयंकर हानि पहुंचाई है।

पुरुषोत्तम अग्रवाल (अंकित के पिता) ने अंकित की काली करतूत का विवरण देते हुए कहा, ” हम चार लोग होटल में ठहरे थे और परंपरा अनुसार हमने तय किया हुआ था कि हम में से जो भी आखिर में नहाने जाएगा, बचा हुआ शैंपू, साबुन और टूथपेस्ट लाने की जिम्मेदारी उसी की होगी। पर लाट साब तो बाथ टब में नहाने में इतने लीन थे कि टूथपेस्ट के अलावा बाकी सब वहीं पे छोड़ के आ गये।”

“हम दुकान पे लोगों को चूना लगाने के लिए जाने जाते हैं और ये साब खुद ही चूना लगवा आए। ऐसी निकम्मी औलाद दुकान का गल्ला कैसे संभालेगी!” -अग्रवाल साब ने कहा।

फिर अपनी जवानी के किस्से सुनाते हुए बोले, “जब मैं होटलों में जाता था, तब पूरा पैसा वसूल किए बिना वापिस नहीं आता था चाहे उसके लिए मुझे रूम में से पानी की बोतलें और तौलिया भी क्यूं ना उठाना पड़े! माना कि आजकल सीसीटीवी का ज़माना है इसलिए तौलिया उठाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन साबुन और शैंपू तो बिना किसी को पता लगे बहुत ही आसानी से पार किया जा सकता है।”

जब उनसे पूछा गया कि अगर अंकित गल्ले पर नहीं बैठेगा तो उसकी जगह कौन लेगा, तो उन्होंने गर्व से जवाब दिया, “मेरा छोटा बेटा संचित कल शताब्दी से घर आ रहा है। अगर वो चालाकी से चाय का सामान, अचार और जैम घर ले आता है, तो गल्ले की चाबी उसी की!”



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