Sunday, 18th February, 2018

चलते चलते

अपने ताऊ का 'डूडल' ना बनाने पर हरियाणा के युवक ने की गूगल के ऑफ़िस में तोड़फोड़

11, Jan 2018 By बगुला भगत

गुरुग्राम. इंटरनेट सर्च इंजन गूगल पर हर दूसरे दिन किसी ना किसी का ‘डूडल’ बना होता है। इसी से प्रेरित होकर एक युवक आज सेक्टर-15 में स्थित गूगल के ऑफ़िस में घुस गया और अपने ताऊ का डूडल बनाने की माँग करने लगा। मना करने पर उसने ऑफ़िस में तोड़फोड़ मचा दी। फिलहाल आरोपी युवक से थाने में पूछताछ चल रही है।

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राजबीर हुड्डा को क़ाबू करते पुलिसकर्मी

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजबीर हुड्डा नाम का युवक आज दोपहर गूगल के ऑफ़िस पहुँचा और अपने ताऊ खचेड़ू का डूडल बनाने की माँग करने लगा। जिसके लिए गूगल के अधिकारियों ने बड़ी विनम्रता से मना कर दिया।

“म्हारा ताऊ इलाके का सबसै बड़ा आदमी था। ऊ 54 गाम्मां की खाप पंचायत का सरपंच भी रहया था। भोत बड्डे-बड्डे काम करे थे म्हारे ताऊ नै! -राजबीर ने छाती चौड़ाते हुए कहा। अधिकारियों ने उसे समझाया कि डूडल ऐसे नहीं बनता, उसके कुछ नियम-क़ायदे हैं।

“दुनिया भर के बणावै है, तो म्हारे ताऊ का कोन्यी बणा सकता?” -राजबीर ने रिसेप्शन पर मुक्का मारते हुए कहा। अधिकारी फिर भी मना करते रहे। यह देखकर राजबीर और उसके साथी बेक़ाबू हो गये और उन्होंने ऑफ़िस में तोड़फोड़ शुरु कर दी।

असल में, कल हरगोबिंद खुराना का डूडल देखकर राजबीर ने अपने प्रॉपर्टी डीलर दोस्त से पूछा कि “गूग्गल पे ये कौण दिख रा सै?”, तो दोस्त ने उसे बताया कि ये हरगोबिंद का डूडल है और जिस किसी का भी डूडल बनता है, उसे बहुत बड़ा आदमी माना जाता है। बस, यही बात राजबीर के दिमाग़ में बैठ गयी।

इस घटना पर जाने-माने समाजशास्त्री जोगेंद्र जाधव का कहना है कि “भारत जैसे देश में तो ये एक ना एक दिन होना ही था। आज नहीं तो कल, लोग अपनी-अपनी जाति और समुदाय के लोगों के डूडल बनाने की माँग करने ही वाले थे। और आज वही हुआ!”

उधर, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भारत के लिये एक नयी ‘डूडल पॉलिसी’ का एलान कर दिया है, जिसके अनुसार, डूडल में सभी धर्मों और समुदायों के लोगों को समान प्रतिनिधित्व दिया जायेगा। इस बीच, डूडल में आरक्षण की माँग भी ज़ोर पकड़ने लगी है।



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