Tuesday, 24th October, 2017

चलते चलते

'लड़की साथ हो तो कैन्टीन में आधा-पौना घंटा ज़्यादा क्यों लगता है?', रिसर्च में हुआ ख़ुलासा

25, Sep 2017 By बगुला भगत

मुंबई. आपने अक्सर देखा होगा कि जब किसी बंदे के साथ कैन्टीन में लड़की बैठी होती है तो वो बेचारा आधा-पौना घंटा ज़्यादा बैठा रहता है। इसके उलट, अगर साथ में लड़के ही लड़के हों तो सब 10-15 मिनट में ही उठ आते हैं। लेकिन लड़की के साथ होने पर वो तब तक उठने का नाम नहीं लेते, जब तक कि उनके किसी सीनियर का मैसेज ना आ जाये।

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लड़की की वजह से एक घंटे से कैंटीन में बैठा युवक

ऐसा क्यों होता है? यह सवाल सालों से समाज-विज्ञानियों को परेशान कर रहा था। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस (TISS) की एक रिसर्च में इस गूढ़ रहस्य से परदा उठ गया है। TISS की इस रिसर्च में ख़ुलासा हुआ है कि लड़के कैन्टीन में जान-बूझकर देर तक नहीं बैठे रहते बल्कि समाज और दुनिया की टेंशन उन्हें ऐसा करने पर मजबूर कर देती है।

“अभी तक लोग यही मानते थे कि लड़कों को कोई लड़की ज़रा सी घास क्या डाल दे, वे वहीं पे चेप हो जाते हैं। फिर वे अपने सेंस ऑफ़ ह्यूमर और नॉलेज का इंप्रेशन झाड़ने में ‘जान’ तक के घोड़े दौड़ा देते हैं। इस काम में उन्हें 15 मिनट से लेकर 2 घंटे तक कितना भी टाइम लग सकता है। अब यह लड़की पर डिपेन्ड करता है कि वो कब उठकर चलने को कहे क्योंकि भाईसाब तो बिल्कुल भी नहीं कहने वाले!” -रिसर्च के हेड कामेश कामातुर ने बताया।

“लेकिन लोगों की ऐसी धारणा एकदम ग़लत है!”, कामेश जी ने समझाते हुए कहा कि “देखिये! इस दुनिया की शुरुआत एक औरत और एक मर्द यानि ‘आदम’ और ‘हव्वा’ के एक साथ बैठने से ही हुई है। इसलिये इस दुनिया की सारी मुश्किलों का हल भी औरत और मर्द के साथ बैठने से ही निकल सकता है। इसलिये लड़की के साथ बैठा लड़का ‘बरेली की बर्फ़ी’ से शुरु करता है और किम जॉन्ग उन तक पहुँच जाता है।”

कामेश ने आईटी इंडस्ट्री के एक एम्पलॉई रोहित का उदाहरण देते हुए कहा कि “रोहित को उसके बॉस कैन्टीन में बैठे रहने को लेकर कई बार वॉर्निंग दे चुके थे लेकिन जब उन्हें उसके असली मकसद का पता चला तो उन्होंने उससे माफ़ी मांग ली।”

तो आप भी अगर अपने ऑफ़िस के किसी बंदे को लड़की के साथ एक घंटे से कैन्टीन में बैठा देखें तो समझिये कि भारत की या दुनिया की कोई ना कोई प्रॉब्लम सॉल्व होने वाली है। इसलिये उन्हें देखकर अपने कुलीग को कोहनी मारने के बजाय उसकी सराहना करें। और चाहें तो आप भी बैठकर समस्या सुलझाने में उनकी मदद करें।



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