Thursday, 25th May, 2017
चलते चलते

चने खाते हुए गिर गए तीन-चार दाने, आधे घंटे तक सोफे के नीचे ढूंढता रहा युवक

14, May 2017 By Ritesh Sinha

इंदौर. लालच आदमी से क्या-क्या करवा देता है, इस बात का नमूना उस समय देखने को मिला, जब एक युवक ने तीन-चार चने के दानों के लिए अपना सम्मान दांव पर लगा दिया। हुआ यूँ कि विवेक दीक्षित नामक युवक, अपने घर में आराम से बैठकर चने चबा रहा था। वो चने हाथ में लेता और उसे दूर से ही अपने मुंह में डालता, जैसा अक्सर लोग करते हैं। कई बार उसका निशाना चूक जाता और चना, मुंह में जाने के बजाय नीचे फर्श पर गिर जाता। दाने गिरने पर विवेक को ऐसा लगता, जैसे किसी ने उसका पॉकेट मार लिया हो, उसके मुंह से निकलता- “ओह.. ये साला फिर गिर गया!” धन्य हो विवेक की स्पीड का, थोड़ी देर में ही प्लेट के सारे चने ख़त्म हो गए। लेकिन इतने चनों से विवेक का जी नहीं भरा, उसे कुछ और खाने की इच्छा हुई लेकिन खाने को वहां कुछ था ही नहीं! वो लालच के मारे तड़पने लगा।

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आधे घंटे से चने की तलाश में जुटा विवेक

तभी उसे याद आया कि खाने के दौरान कुछ चने नीचे गिर गए थे। बस, फिर क्या था, वो घुटनों के बल फर्श पर आ गया और उन बहुमूल्य चनों को ढूंढने लगा। पांच मिनट तक लगातार खोजने के बाद उसे एक चना नज़र आया, जो दीवार के सहारे एक कोने में चुपचाप बैठा था। “अच्छा! तो तू यहाँ छिपा है!” कहते हुए विवेक उस पर झपट पड़ा।

फिर दूसरे चनों की तलाश में निकल पड़ा। आधे घंटे की कमरतोड़ मेहनत रंग लाई और उसे लगभग सभी चने मिल गए। उन चनों को उनके सही अंजाम तक पहुंचाने के बाद विवेक बड़ी मुश्किल से खड़ा हुआ। इस घटना को विवेक की पत्नी प्रीति भी किचन से देख रही थी, इस तरह ये बात पूरे मोहल्ले में फैल गई कि विवेक गिरे हुए चनों को भी खा लेता है।

लोग तरह-तरह की बातें करने लगे। विवेक के पड़ोसी श्यामलाल ने बताया कि “उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था, अरे लालच की भी कोई हद होती है। पैसा तो आ गया, पर क्लास नहीं आया विक्कू (विकास का घर का नाम) के पास।” वहीँ कुछ लोगों ने विवेक पर ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की वाट लगाने का आरोप लगाया है। “हमारा शहर देश के सबसे साफ़-सुथरे शहरों में नंबर वन है, लेकिन ये क्या? अपने ही घर का लड़का गिरे हुए चनों को बिना धोये-पोछे खा रहा है। विक्कू को ऐसा नहीं करना चाहिए था।” -एक अन्य पड़ोसी ने अपने विचार रखे। हालाँकि, विवेक ने इन आरोपों का खंडन किया है, उसने कहा कि इंदौर की गरिमा को ध्यान में रखते हुए उसने चनों को पहले अच्छे से पोछ लिया था।



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