Monday, 20th November, 2017

चलते चलते

सबसे अमीर इंसान बनना चाहता था युवक, बैंक क्लर्क की जॉब लगते ही सब कुछ भूला

02, Aug 2017 By Ritesh Sinha

मेरठ. प्रवीण चंद्रा, जब 22 साल का था तो वो बड़े-बड़े सपने देखा करता था, वो सोचता था कि एक दिन उसकी भी किस्मत खुलेगी और वो दुनिया का सबसे अमीर इंसान बनेगा। उसके पास कई आलीशान बंगले होंगे, लंबी-लंबी गाड़ियाँ होंगी, नौकर चाकर होंगे, लेकिन उसकी जिंदगी में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। यहाँ तक कि उसे बैंक क्लर्क की नौकरी के लिए भी एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाना पड़ा। अब प्रवीण 30 साल का हो चुका है, और अमीर बनने के सपने अब उसे सपने में भी नहीं आते।

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दफ़्तर की फ़ाइलों के पीछे बैठा प्रवीण

खुद प्रवीण ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि “मैं बचपन से ही एक कामयाब इंसान बनना चाहता था। मैं कुछ ऐसा करना चाहता था, जो बड़ा हो, बहुत बड़ा! बिल गेट्स और एलॉन मस्क के फोटो मैंने अपने कमरे में चिपका रक्खे थे। इसके अलावा मुझे कुछ नया खोजने का भी बहुत शौक था। मैं कोई नया स्टार्ट-अप शुरु करना चाहता था या कोई नया एप डेवलप करना चाहता था, ताकि रातों-रात अरबपति और फ़ेमस बन जाऊं! एक बार तो मैं गायब होने की मशीन भी बनाना चाहता था, लेकिन उसमें भी कुछ बात नहीं बनी!”

“धीरे-धीरे मेरे ये सारे सपने चकनाचूर हो गए, और मुझे रियलिटी एक्सेप्ट करके मजबूरी में बैंक एग्जाम की तैयारी करनी पड़ी। अब मैं इधर एक सरकारी बैंक में क्लर्क हूँ, और इस जॉब से बहुत खुश भी हूँ!” -उसने मुस्कुराते हुए कहा। साथ ही उसने दावा किया कि उसे अब कुछ नहीं बनना है और वह अपने सारे सपने बोरी में भरकर फेंक चुका है।

उधर, मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर निरमल सिंह ने बताया कि, “इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, ऐसा हर किसी के साथ होता है। और बड़े-बड़े सपने देखने में कोई बुराई भी नहीं है, मैं खुद वैज्ञानिक बनकर मिसाइल बनाना चाहता था, लेकिन आज कॉलेज में पढ़ा रहा हूँ! इसलिए प्रवीण को भी ज्यादा टेंशन नहीं लेना चाहिए!”



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