Wednesday, 29th March, 2017
चलते चलते

मेहमानों ने जाते वक्ते नहीं दिया शगुन, बच्चों ने की भूख हड़ताल

05, Jul 2016 By banneditqueen

बनारस. दातार काॅलोनी में दो बच्चे घर के बाहर भूख हडताल पर बैठे थे।बच्चो के रोने चीखने की आवाज़ सुनकर सारा मोहल्ला इकठ्ठा हो गय़ा, मोहल्ले वालों में फेकिंग न्यूज़ संवाद्दाता भी मौजूद थे।बच्चो ने सारा किस्सा सुनाने के बाद संवाद्दाता को बताया कि हमारे साथ धोखा हआ है आजतक कोई महमान बिना शगुन दिये अपने घर नहीं गया।

शगुन के पैसों के लिये रोता मुन्नू
शगुन के पैसों के लिये रोता मुन्नू

हुआ यूं कि पिछले हफ्ते मिश्रा जी के घर बिन बुलाए उनके ममेरे भाई का परिवार आ पहुँचा|मिश्रा जी की पत्नी मन ही मन आग बबूला हो रही थीं एक तो महीने का आखिर ऊपर से 4 लोग घर में और आ गए।बच्चे बेहद खुश थे ये सोचकर के जाते वक्त वे दोनों को 501-501 रुपये मिलेंगे और वे अपना मनपसंद खिलौने खरीद पाएंगे।पूरे 10 दिन बिताने के बाद आखिर वो घड़ी आ गई जब मिश्राइन ने चैन की साँस ली,मेहमानों के जाने का वक्त आ गया था|बच्चे मन ही मन फूले नहीं समा रहे थे ये सोचके कि कब ये लोग घर की चौखट पे कदम रखें और कब हाथ में 500 का नोट यह बोलें कि रख लो शगुन है।बच्चों ने शगुन मिलते वक्त ना बोलने की प्रैक्टिस भी कर ली थी|

मेहमान घर के दरवाजे पर खड़े थे “अगली छुट्टियों में घर ज़रूर आना” बोलने का दौर चल रहा था देने बच्चे आस लगाए खड़े थे कि अब शायद चाचा या चाची उन्हें पास बुलाकर हाथ में नोट रखते हुुए कहेंगे कि ‘लो चॉकलेट खा लेना’, पर ऐसा नहीं हुआ।फिर बच्चों ने सोचा कि शायद रेल्वे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने से पहले शगुन देंगे पर ऐसा भी नहीं हुआ।कानपुर की ट्रेन पकड़कर पूरा परिवार बच्चों की उम्मीदों पर पानी फेरकर चला गया|बच्चे हताश होकर घर लौटे और मिश्रा जी के ममेरे भाई के खिलाफ घर के बाहर ही धरना देने बैठ गए।बच्चों का कहना था कि वे तब तक भूख हड़ताल पे बैठे रहेंगे जब तक उन्हें शगुन के पैसे नहीं मिल जाते।

बहुत मशक्कत के बाद मिश्रा जी ने अपनी ही जेब हल्की कर के बच्चों को 500 का नोट यह बोल कर थमाया कि ये चाचा जी ने सुबह सुबह दिया था पर वो देना भूल गए| मिश्राइन ने दुःखी मन से फेकिंग न्यूज़ संवाद्दाता को बताया कि मेहमान आए तो आए जाते वक्त कंगाली में आटा गीला कर गए|



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