Sunday, 22nd April, 2018

चलते चलते

इनटॉलरेंस: गुटखा खाने के दो मिनट बाद ही युवक को थूकने के लिए किया गया मजबूर

03, Apr 2018 By Ritesh Sinha

कानपुर. देश मे असहिष्णुता अब एक नये लेवल पर पहुँच गयी है। ख़बर मिली है कि कानपुर के रहने वाले ललित कुमार को अभी गुटखा खाए हुए सिर्फ दो मिनट ही हुए थे कि उनके दोस्तों ने उसे गुटखा थूकने पर मजबूर कर दिया। जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। पहले ललित आधे-आधे घंटे तक गुटखा मुँह में दबाए जीवन यापन कर लेता था। लेकिन कल उसके निर्दयी दोस्तों ने उसे ऐसा नहीं करने दिया!

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गुटखा मुँह के हवाले करता ललित

हुआ यूँ कि कल शाम को ललित अपने तीन दोस्तों के साथ जोगी टी-स्टाल पर बैठकर गप्पे मार रहा था। देश की बहुत सारी समस्याओं पर खुलकर चर्चा हो रही थी। लेकिन इस महत्वपूर्ण चर्चा में ललित का योगदान बहुत कम था। वो बीच-बीच में एक-दो लाइन बोलता था, जो गुटखे की वजह से किसी के पल्ले नहीं पड़ती थीं।

“अबे थूक दे ना! तेरी कोई बात हमारे पल्ले नहीं पड़ रही!” -चुम्मन ने उससे एक बार कहा भी लेकिन उसने इस वॉर्निंग को हल्के में ले लिया। वैसे भी ललित गुटखे की जान निकालने पर तुला हुआ था! भला वो कैसे थूक देता! आधे घंटे तक बेदर्दी से रस चूसने के बाद ही उसने अपना मुँह गुटखे से आज़ाद कराया। सबने राहत की साँस ली।

लेकिन थोड़ी ही देर बाद ललित को फिर से तलब उठ गई। वो चुपके से बगल में गया, अपना मुँह आसमान की ओर उठाया और एक नया पैकेट मुँह में खाली कर दिया। उधर, इन चारों की बातचीत लगातार चल रही थी। “2019 में मोदी जीतेगा कि नहीं?” -सामने बैठे फत्तन ने प्रश्न किया।

“अबे! डीटेगा टैसे नहीं? ठामने राहुल डांडी डैसा बंडा डो है!” -महफ़िल को हाइजैक करते हुए ललित बीच में बोल पड़ा। इसके बाद तो उसके दोस्त एक मिनट भी नहीं रुके और उन्होंने उसे लतियाना शुरू कर दिया।

“तूने फिर से खोंस लिया ना!” -दिनेश ने हाथ साफ़ करते हुए कहा। “थूक! यहीं के यहीं! नहीं तो हमसे बुरा कोई नहीं होगा!” -कहते हुए सबने ललित को गुटखा थूकने के लिए मजबूर कर दिया। बड़े-बुजुर्गों ने बताया कि पूरे कानपुर शहर में इस तरह की यह पहली घटना है।



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