Wednesday, 29th March, 2017
चलते चलते

फॉरेन रिटर्न लड़के ने चाय वाले भैया से मांगी 'चोको-नट लाटे', खायीं चप्पल और लातें

04, Sep 2016 By Pagla Ghoda

दिल्ली: दो हफ्ते की छुट्टी के बाद अमेरिका से लौटे छात्र परेश नंदा जो आजकल खुद को ‘पैरी’ कह रहे हैं, अपनी एक छोटी सी गलती के कारण हस्पताल जा पहुंचे। दरअसल कल शाम करीब साढ़े पांच बजे परेश उर्फ़ पैरी सड़क के किनारे मंगलू चाय वाले के ठेले पे चाय और समोसे का नाश्ता करने गए थे। वहां जाकर उन्होंने अपनी ‘एक्सेंट’ वाली हिंदी मिक्स अंग्रेजी में मंगलू से ‘सामोसाज़’ एंड चोको-नट लाटे (choco-nut latte) की मांग कर डाली।

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लाल मखमली गरम लातें

पहले कुछ समय तो मंगलू पैरी को नज़रअंदाज़ कर दूसरे ग्राहकों को चाय-नाश्ता इत्यादि देता रहा, पर जब बाद में पैरी ने चीख चीख कर ‘लाटे’ की मांग की तो मंगलू अपना आपा खो बैठा और पैरी को जमकर घूसों और लातों का नाश्ता करवाया। मौका-ए-वारदात पर मौजूद लोगों के अनुसार मंगलू एकदम पगला गया था और बार बार कह रहा था- “लाते चाही तोहका, ई लौ लातें!” वो पैरी को पकड़ कर उसका सर चाय के गरम बर्तन में भिगोने ही वाला था पर तभी ठेले पे खड़ी एक खूबसूरत महिला ग्राहक ने मीठी आवाज़ में बीच बचाव किया। बाद में उन्हीं महिला ने पैरी की ‘एक्सेंट’ वाली हिंदी को नार्मल हिंदी में ट्रांसलेट करके मंगलू को समझाया और शांत किया।

श्री गुलज़ारी लाल नंदा, जो कि परेश उर्फ़ पैरी के पिता हैं, भी उसकी हरकतों से काफी परेशान हैं। उन्होंने कहा, “परेश सिर्फ दो हफ्ते के लिए अपने भाई के पास लॉस एंजेलिस गया था छुट्टी मनाने। लेकिन इन दो हफ़्तों में ही उसकी ज़बान में काफी एक्सेंट आ गया है। होटल में जाता है तो समोसे की बजाय ‘patty filled with spiced potatoes’ मांगता है। चाय की बजाय ‘latte’ मांगता है। टैक्सी बुलानी हो तो हाथ टेढ़ा करके ‘cab hail’ करने की कोशिश करता है। इस चक्कर में उस दिन तो उसका हाथ कटते-कटते बचा। उसने अपना नाम भी परेश से बदल कर पैरी या परी ऐसा कुछ रख लिया है। अब परी भी कोई नाम है भला? कौन समझाए इस कमबख्त को! कई सालों के आचार-विचार और संस्कार 15 दिन में ही भुला बैठा है बदतमीज़!” बोलते बोलते गुलज़ारी लाल जी का चेहरा लाल हो गया।

संस्कारों के विशेषज्ञ और मशहूर अदाकार श्री परलोक नाथ जी ने भी युवाओं में घटते संस्कारों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा, “बच्चे दो हफ्ते के लिए विदेश क्या जाते हैं, सालों की शिक्षा भूल जाते हैं। लेकिन ऐसे असंस्कारी बच्चों को संस्कारी बनाने के उपाय भी मेरे पास हैं। मेरी टेक्नोलॉजी टीम ने wheresyoursanskaar.com नामक वेबसाइट बनायी है, जिस पर जाकर बच्चे लोग हर तरह के संस्कार सीखने के लिए फ्री ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं। साथ ही हमने एक sanskaarz नाम की हॉटलाइन भी स्टार्ट की है, जिस पर फ़ोन करके बच्चे ‘संस्कारी कैसे बनें’ इससे सम्बंधित सवाल पूछ सकते हैं| …अच्छा अब मेरी तपस्चर्या का समय हो गया है, अब आप लोग जाइये।” परलोक नाथ जी ने बीयर का पाइंट खोलते हुए कहा और हमारे रिपोर्टर को आशीर्वाद देकर विदा किया।



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