Thursday, 19th January, 2017
चलते चलते

दीवाली की सफाई में निकले सोन पपड़ी के 100 से अधिक डब्बे, खोल ली मिठाई की दुकान

10, Oct 2016 By banneditqueen

भोपाल. ईदगाह हिल्स में रहने वाला रमतानी परिवार इस बार दीवाली आने से कई दिन पहले ही घर की साफ़-सफ़ाई में जुट गया। घर के सदस्य और सभी नौकर हर एक कोने की सफाई कर रहे थे। सबसे छोटा सदस्य चिंटू सारा सामान इधर से उधर करने में लगा था। पंद्रह वर्षीय मुनमुन मम्मी के पुराने ज़ेवर और कपड़ों से नज़र नहीं हटा पा रही थी।

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रमतानी परिवार की सोन पपड़ी की दुकान

वहीं, मुनमुन की माँ हर फेंकने लायक सामान को यह बोलकर वापस रख रही थी कि “अरे इतने साल से सम्भाल कर रखा है, ऐसे कैसे फेंक दूँ?” मुनमुन के पिताजी एक तरफ से सामान फेंक कर आते और दूसरी तरफ से मुनमुन की माँ मुनमुन को भेज कर वो सामान वापस अंदर रखवा देतीं। घर के बाहर आंगन में फेंकने लायक सारा सामान इकठ्ठा किया जा रहा था।

तकरीबन दस दिन से हो रही इस सफाई में कई साल पुराने खोए हुए बर्तन मिले तो कई खोई हुई कंघियाँ भी मिल गयीं। इस सबके बीच, एक चीज़ जो लगभग हर कमरे से मिली वो थी सोन पपड़ी के डब्बे! जब सारे घर की सफ़ाई ख़त्म हुई तो रमतानी परिवार के पास लगभग 100 से अधिक डब्बे जमा हो गए।

आँगन में कचरे के अलावा अगर कुछ था तो दीवाली में तोहफे के रूप में मिले ये डब्बे! पूरा रमतानी परिवार सोच में पड़ा हुआ था कि इन डब्बों का क्या करें, तभी मंझले बेटे सुधीर ने सुझाव दिया कि “क्यों ना अपनी दुकान के पीछे जो मंदिर है उसके बगल में इन सारे डब्बों का स्टॉल लगा दें?” सुधीर के पिताजी को भी ये आइडिया जम गया। उन्होंने कहा “इन सारे डब्बों को अच्छे से पोछकर वहां सजा दो और बिट्टू को काउंटर पे बिठा दो!” और इस तरह उन्होंने उन डब्बों से मिठाई की दुकान खोल दी।

बाद में, सफ़ाई के बदले पैसे मांगने वाले नौकरों को भी रमतानी परिवार ने सोन पपड़ी के डब्बे देकर ही टरका दिया।



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