Sunday, 20th August, 2017

चलते चलते

दिवाली से पहले 'चूहों' ने की आपातकालीन मीटिंग, 'इंसानों के वार से कैसे बचें?' -विषय पर हुई चर्चा

24, Oct 2016 By Ritesh Sinha

दिल्ली. दिवाली से पहले घरों में होने वाली साफ़ सफाई को देखते हुए चूहों ने पिछले रविवार को एक आपातकालीन मीटिंग का आयोजन किया। इस मीटिंग में इंसानों के  ‘वार’ से बचने के तरीकों पर गंभीर चर्चा की गई। साथ ही इस मीटिंग में बुजुर्ग चूहों ने, नौजवान चूहों को छुपने की नई-नई जगह की जानकारी दी। गौरतलब है कि दिवाली से ठीक पहले जब लोग अपने घर की साफ़-सफाई करते हैं तो चूहे और इंसानों में अक्सर मुठभेड़ हो ही जाती है। इसी मुठभेड़ से बच निकलने के तरीकों पर चर्चा के लिए ये मीटिंग रखी गई थी। इस महत्वपूर्ण मीटिंग में शामिल होने के लिए पूरी दिल्ली से चूहे आए हुए थे।

दिवाली की सफाई से डरे हुए चूहे
दिवाली की सफाई से डरे हुए चूहे

सबसे पहले पिछले साल शहीद हुए चूहों को श्रद्धांजलि दी गई। उसके बाद चूहों के अध्यक्ष मूषक कुमार ने अपना ओजस्वी भाषण दिया- “दोस्तों! सदियों से ये ज़माना हमारा दुश्मन रहा है। लेकिन हमें हार नहीं माननी है। हमें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी, हमारे लिए कैंडल मार्च निकालने कोई नहीं आएगा। मैं आपसे अपील करता हूँ कि इस दिवाली सतर्क रहें और इंसानों के वार से बचकर इंसानों को उनकी औकात दिखाते रहें।” अध्यक्ष के भाषण के बाद एक अनुभवी चूहे ने सभी चूहों को कुछ टिप्स दिए-“टमाटर खाने से पहले अच्छी तरह जांच लें कि उसमे कुछ मिलाया तो नहीं गया है। जब कोई महिला बेलन फेंककर मारे तो अपना चेहरा बचाइए और तेज़ी से वहां से भाग जाइए। साथ ही हमारी पूंछ पर इंसान नज़रें लगाए बैठे रहते हैं इसलिए अपनी पूंछ का विशेष ध्यान रखिए।”

इसी बीच ‘संसद भवन’ के सभी चूहे इस मीटिंग में शामिल होने के लिए वहां पहुँच गए। इससे पता चलता है कि नेताओं के साथ रह-रहकर संसद भवन के चूहों को भी देर से आने की बीमारी लग गई है। संसद भवन से आए चूहों का विशेष स्वागत किया गया। आखिर में सभी चूहों ने मॉक-ड्रिल को अंजाम दिया और अपने-अपने बिलों की ओर चले गए।



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