Wednesday, 22nd November, 2017

चलते चलते

पीने के बाद सिगरेट ढूंढते-ढूंढते दिल्ली से मोदीनगर पहुँच गये तीन दोस्त

06, Jul 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. कहते हैं कि जहाँ चाह, वहाँ राह! और अगर बात पीने वालों की चाहत की हो तो फिर तो कहने ही क्या! दिलशाद गार्डन में रहने वाले तीन दोस्त भी कल रात सिगरेट की चाह में दिल्ली से 60 किलोमीटर दूर मोदीनगर पहुँच गये। लेकिन तीनों लौटे अपनी तलब मिटाकर ही!

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कश लगाने के बाद ही चैन पड़ा भाई लोगों को

हुआ यूँ कि ब्लॉक-3 में रहने वाले मोहित को उसकी कंपनी ने 5% इंक्रीमेन्ट दिया था, इसी ख़ुशी में वो अपने दोस्त विशाल और मयंक को अपने फ़्लैट पर पार्टी दे रहा था। पीते-पीते रात के दो बज गये और उनकी सिगरेट ख़त्म हो गयीं।

“साला हमेशा यही करेगा। सिगरेट लाने में कंजूसी करेगा। अबे, हमें बोल देता, हम ले आते! नमकीन भी तो ले के आये थे।” -विशाल ग़ुस्से में बड़बड़ाया। “अभी तो एक हाफ़ बचा हुआ है, साला बिना सिगरेट के कैसे चलेगा!” -मयंक तड़पते हुए बोला। “यार मैं समझ रहा था कि एक पैकेट पड़ा है ड्रॉअर में। पता नहीं कहाँ गया!” -मोहित ने बेड के नीचे ढूंढते हुए कहा।

इस तरह आधे घंटे तक झगड़ने के बाद तीनों सिगरेट ढूंढने निकल पड़े। रात के ढाई बज चुके थे, इसलिये काफ़ी दूर तक कोई खोखा या पान की दुकान नहीं मिली तो दोनों ने मोहित को बाइक लेने भेज दिया। फिर तीनों बाइक पर चल पड़े।

दिलशाद गार्डन मेट्रो स्टेशन से मोहन नगर होते हुए वे ग़ाज़ियाबाद पहुँच गये, लेकिन कहीं भी कुछ नहीं मिला। इसके बाद चलते-चलते दुहाई, मुरादनगर पहुँच गये लेकिन वहाँ भी सब बंद! अंत में, मोदीनगर में उन्हें बस अड्डे पर एक खोखा खुला दिखाई दिया। खोखा देखते ही तीनों की आँखों में ऐसी चमक आ गयी, जैसे चार दिन के प्यासे को पानी मिल जाये। पहले तो उन्होंने वहीं पे एक-एक सिगरेट पी, उसके बाद वापस चल पड़े।

उधर, घरवालों ने घबराकर पुलिस में कंपलेंट कर दी। पुलिस ने तीनों के मोबाइल सर्विलाँस पर लगाये तो सभी स्विच ऑफ़ मिले और आख़िरी लोकेशन मुरादनगर की मिली। घरवाले डर गये कि कहीं किसी ने किडनैप तो नहीं कर लिया। तभी मयंक का फ़ोन लग गया। उसके पापा की आवाज़ आयी- “कब से तुम्हें फ़ोन लगा रहे हैं…तुम हो कहाँ पे? और तुम्हारा फ़ोन क्यूँ ऑफ़ था?”

“वो…फ़ोन जेब में रखे-रखे पता नहीं कैसे ऑफ़ हो गया, अभी ऑन किया है। बस आ रहा हूँ…” -मयंक बोला। “लेकिन तुम मोदीनगर में क्या कर रहे हो?” “वो…पापा, एक दोस्त को छोड़ने आ गये थे। बस आ रहे हैं।” कहकर उसने फ़ोन काट दिया और बाइक का एक्सीलेटर दबाते हुए बोला- “साला आज फिर ‘हाफ़ डे’ लेना पड़ेगा।”



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