Thursday, 18th January, 2018

चलते चलते

दिल्ली में कार का क़हरः 'नैनो' खरीदते ही टूट गया लड़के का रिश्ता

08, Dec 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. घर में नयी कार का आना शुभ माना जाता है लेकिन मुनिरका में रहने वाली टोकस फ़ैमिली पर उनकी नयी कार आफ़त बनकर टूट पड़ी है। इधर टोकस फ़ैमिली ने ‘नैनो’ ख़रीदी और उधर उनकी साढ़े साती शुरु हो गयी। सबसे पहले उनके बेटे शैंकी का रिश्ता टूट गया, जिसके बाद टोकस फ़ैमिली ने कार को कहीं छुपाकर खड़ा कर दिया है।

Nano Car
नैनो ख़रीदकर घर लाती टोकस फ़ैमिली

पड़ोसियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीपल वाले मौहल्ले में रहने वाले सतपाल टोकस दो दिन पहले नैनो ख़रीद कर लाये थे। जिसकी ख़ुशी में उन्होंने पार्टी भी दी थी, जिसमें ऑल्टो के बराबर ख़र्चा हो गया। पार्टी में नैनो की तारीफ़ करते हुए सतपाल ने कहा कि “बई घणी बढ़िया कार है! सस्ती है, माइलेज भी अच्छा देवै है और जगह भी कम घेरै है।” यह सुनकर लोग एक-दूसरे को कोहनी मारकर हँसने लगे, जिस पर सतपाल भाईसाब ने ध्यान नहीं दिया।

लेकिन दिन निकलते ही जैसे ही यह ‘न्यूज़’ नज़फ़गढ़ में शैंकी की होने वाली ससुराल में पहुँची तो उन्होंने मोबाइल पर ही रिश्ता तोड़ दिया। शैंकी के भावी ससुर धर्मवीर ने फ़ोन पर चिल्लाते हुए कहा, “उस बिचौला नै तो बड़ा खाता-पीता घर बताया था। अरै जो कंगले नैनो ख़रीद रे हैं, वे म्हारी बेटी नै कैसै ख़ुश रख पावैंगे?”

“नैनो सै जादा तो म्हारे घर में किराया आवै है। दो फैमिली मैंबर पूरे महीन्ने किराया वसूलने पै ही लगे रहवै हैं। म्हारी रिश्तेदारी में तो किसी नै आज तक ऑल्टो या वैगन-आर तक नहीं ख़रीदी, थारे सै रिश्तेदारी कर कै हम बिरादरी में के मुँह दिखावंगे!” -कहते हुए उन्होंने फ़ोन पटक दिया।

और सिर्फ़ नज़फ़गढ़ ही नहीं, दिल्ली के कोने-कोने में लोग थू-थू करते हुए कह रहे हैं- “कोई भले घर का आदमी नैनो ख़रीदता है क्या!” इस पर जाने-माने समाजशास्त्री जोगेंद्र जाधव का कहना है कि “टाटा को इसे ग़रीबों की कार कहना ही नहीं चाहिये था! इंडिया में कौन ख़ुद को ग़रीब कहलवाना पसंद करता है, और दिल्ली-एनसीआर वाले तो बिल्कुल भी नहीं! टाटा को इनकी फ़ीलिंग्स का भी ख़याल रखना चाहिये था।”



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