Wednesday, 13th December, 2017

चलते चलते

फेसबुक AI की तरह दिल्ली के लड़के ने भी बनाई ना समझ में आने वाली भाषा, माँ-बाप ने घर से निकाला

04, Aug 2017 By Pagla Ghoda

नई दिल्ली. पंजाबी बाग़ के पिंक अपार्टमेंट्स के रेजिडेंट जतिन्दर भाटिया के इकलौते पुत्र शैंटी को घर से निकाल बाहर कर दिया गया है। कारण यह कि फेसबुक AI की तरह शैंटी ने भी एक ऐसी भाषा ईजाद कर ली थी, जो उसके माता-पिता की समझ से बाहर थी।

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शैंटी पर भड़कतीं मम्मी तरविंदर कौर

शैंटी के पिता श्री जतिन्दर ने बताया, “ये पहले ‘यो ब्रो’ और ‘सप मैन’ जैसे शब्द बोलता था तो हमें फिर भी समझ में आ जाते थे, माँ-बहन की गालियां भी चलो हम सुन लेते थे। अब इसके मित्रों और इसके बीच में उस भाषा का भी एक और विकृत रूप आ चुका है जो हमारी समझ से एकदम बाहर है। दोस्तों को फ़ोन करता है तो क्या बात करता है हमारे तो एक भी शब्द पल्ले नहीं पड़ता। तेज़ी से बोलता है तो लगता है मानो गरारे कर रहा है।”

“एक दिन जब मैं बालों में मेहँदी लगा रहा था तो मुझसे बोला, “पोप्स योर हेयर इस लुकिंग लाइक क्रेजी शिट ऍफ़” तो मुझे लगा कि शायद काफी बड़ी गाली दे दी है, बाद में गूगल करने पे पता चला कि शायद कुछ अच्छा ही कहा था। खैर हमने अब उससे कह दिया है कि बेटे-लाल अपने पुराने स्वरूप में वापिस आ जाओ नहीं तो अभी तो घर से निकाला है, कल को ज़मीन-ज़ायदाद से भी बेदखल कर दिए जाओगे। जब फेसबुक जैसी कंपनी अपने बच्चे को, यानी कि अपनी AI को अपनी खिलाफी करने पर बंद कर सकती है तो हम क्यों नहीं?” -भाटिया जी ने ग़ुस्से में कहा।

जहाँ, शैंटी के घर से निकाले जाने के बाद उसकी माताश्री श्रीमती तरविन्दर कौर का रो-रो कर बुरा हाल है, वहीँ उसकी बहन हिना काफी खुश है। अपनी खुशी छिपाने की नाकाम कोशिश करते हुए उसने कहा, “भैया के जाने के बाद से ना मुझे काफी बुरा लग रहा है। वैसे तो अब पूरा कमरा मेरा ही है पर, और मेरी फ्रेंड्स और मैं अब घंटों तक यहाँ बैठ के बिचिंग करते हैं, पर है तो ये दुःख की बात ही, भैया को धक्के मार के पापा ने घर से निकाल दिया। भैया की गुल्लक भी उस दिन मुझसे गलती से नीचे गिर के टूट गयी थी, तो उसमे से जो पांच सौ सैंतीस रूपये निकले, उससे मैंने पार्लर में जा के ऑय-लैशेस बनवा ली, पर भैया के जाने का ग़म तो हम सबको है ही।”

शैंटी कब घर वापस लौटेगा ये कहना तो मुश्किल है परन्तु भाषा-शास्त्र के विशेषज्ञों की मानें तो  व्हाट्सअप और स्नैपचैट से पीड़ित युवा पीड़ी को शॉर्टकट शब्द इस्तेमाल करने की ऐसी आदत पड़ चुकी है जिसके कारण उनकी भाषा के शब्द कट कट-कर या तो अपने असली मायने खो चुके हैं, या फिर केवल हैशटैगों तक सीमित हो के रह चुके हैं, जिस कारण वो उनके माता-पिता की समझ से बाहर हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे एक नए तरीके के जनरेशन गैप का भी नाम दे रहे हैं।



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