Wednesday, 29th March, 2017
चलते चलते

फ्री में चाय पीने के लिये बार-बार ATM की लाइन में लग रहा था बेरोज़गार इंजीनियर, भीड़ ने दबोचा

21, Nov 2016 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. भारत में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो किसी भी मौक़े का फ़ायदा उठाने से नहीं चूकते, वे हर मुसीबत में अपने लिये अवसर ढूंढ लेते हैं। मुखर्जी नगर में भी आज एक ऐसे ही युवक का भंडाफोड़ हुआ, जो नोटबंदी का फ़ायदा उठाकर मुफ़्त के चाय-समोसे उड़ा रहा था। मनोज मिश्रा नाम का यह युवक चाय के चक्कर में कई दिनों से एटीएम की लाइन में लग रहा था।

Chai- ATM
ऊपर पीले घेरे में मनोज, दिन की चौथी चाय पीता हुआ

यह शातिर चाय-खोर उस समय पकड़ में आया, जब एटीएम पर लगी भीड़ को फ्री चाय-समोसे बांट रहे भूपेंदर भाटिया ने उसे पहचान लिया और चाय में रंगे हुए होठों के साथ पकड़ लिया।

“भाईसाब, आज तक इसने एटीएम से एक धेला भी नहीं निकाला और ना ही कोई नोट बदला! ये बंदा लाइन में सबसे पीछे लगता है और 4-5 घंटे में दो-तीन बार चाय गटक लेता है। और इसकी चालाकी देखो! जैसे ही इसका नंबर आने वाला होता है, तो ये सू-सू का बहाना बनाकर लाइन से निकल जाता है और फिर किसी दूसरे बैंक के एटीएम पे पहुंच जाता है। धंधा ही बना लिया बंदे ने!” -भूपेंदर ने हमारे रिपोर्टर को चाय देते हुए कहा।

एटीएम के सामने खड़े एक चश्मदीद ने बताया कि “शुरु में हमने समझा कि वो कोई मोटा आसामी है, जो बार-बार नोट बदलने के लिये लाइन में लग रहा है। लेकिन जब हमें उसकी सच्चाई पता चली तो हमने उसे पकड़ लिया।”

“और जब हम उसे खर्चा-पानी देने लगे तो वो चिल्लाने लगा- ‘कंगला नहीं हूं मैं! पैसे हैं मेरे पास…ये देखो!’ और हमें जेब से दो हज़ार का नोट निकालकर दिखाने लगा। फिर शर्ट के बाजू से नाक साफ़ करता हुआ बोला- ‘सिविल इंजीनियर हूं मैं, कोई भिखारी नहीं हूं। जॉब ढूंढ रहा हूं। चाय पीने के लिये छुट्टे नहीं हैं…हां…छुट्टे नहीं हैं मेरे पास’ और बड़बड़ाता हुआ चला गया।” -दूसरे चश्मदीद ने कहा।



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