Monday, 27th February, 2017
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उच्चस्तरीय भिखारी समिति ने की साढ़े सात और 15 रूपये के नए नोट निकलने की मांग

07, Dec 2016 By Pagla Ghoda

मुम्बई. साउथ बॉम्बे भिखारी एसोसिएशन (SBBA) का हर भिखारी जहाँ सौ और पांच सौ जैसी बड़ी भीख पाने का आदी है, तो वहीं नॉर्थ बॉम्बे भिखारी एसोसिएशन (NBBA) के भिखारियों के लिए तस्वीर उतनी रंगीन नहीं है। चूंकि उन्हें भीख में छुट्टे पैसे ही मिला करते थे और अब देश की जनता के पास चेंज की भयंकर कमी है। इसलिये उन्होंने सरकार से कुछ नये नोट चलाने की मांग की है।

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NBBA की मांगों को पढ़ते वित्त मंत्री जेटली

NBBA के चेयरमैन श्री पुरुषार्थी लाल ने बताया, “पैंतीस साल हो गए साहब इसी सिग्नल पे भीख मांगते हुए। तीन बंगले और दो ऑडी गाड़ियां खरीद चुका हूँ, इतनी आमंदनी हो जाती है। लेकिन नोटबंदी के बाद से तो मानो देश में चेंज का सूखा ही पड़ गया है। किसी भी आगंतुक से भीख मांगो तो वो दो हज़ार का बैंगनी नोट दिखा देता है। अब साला दो हज़ार के छुट्टे कहां से लायें?”

पुरुषार्थी जी ने अपनी मांगों की लिस्ट निकालकर दिखाते हुए कहा, “सरकार 20, 50 और 100 रुपये के नोटों की सप्लाई ख़ूब बढ़ाये, हमें कोई प्रॉब्लम नहीं! हमारी तो बस इतनी डिमांड है कि उनके साथ-साथ साढ़े सात और पंद्रह रूपये के नए नोट भी निकाले। इससे भिखारी समुदाय को काफी सुविधा रहेगी।”

भिखारी विशेषज्ञ मंगेश कटोरिया ने साढ़े सात और पंद्रह रूपये के नए नोट की मांग के पीछे के मनोविज्ञान को समझाते हुए कहा, “देखिये पाँच रूपये में एक सिगरेट या एक छोटी चाय ही आ पाती है, अब अमूमन आप उससे तो ज़्यादा की ही भीख देना चाहेंगे। लेकिन दस रूपये देखा जाए तो थोड़ा ज़्यादा लगता है। इसलिए पांच और दस के बीच का भी कोई नोट होना चाहिये, ताकि देने वाला ‘सिर्फ़ पाँच रुपये’ देने की हीन भावना से भी ग्रस्त ना हो और दस रूपये देते हुए उसके मन में ‘फीलिंग ऑफ़ लॉस’ भी ना आये।”

“तो फिर 15 रुपये का नोट क्यूँ?” इसके जवाब में उन्होंने कहा कि “15 इसलिए कि अगर कभी दो भिखारी साथ में आ जायें और आपके पास साढ़े सात रूपये के दो नोट ना हों तो एक पंद्रह रूपये का नोट देकर आप उसे बांटने को भी कह सकते हैं।” “लेकिन अगर कल को ये लोग साढ़े बारह और पच्चीस रूपये के नोटों की मांग करने लगे तो?”, इस पर कटारिया जी ने आसमान की ओर देखते हुए कहा, “तब की तब देखी जायेगी, We will cross that bridge when we get there!”

इस मुद्दे पर नई दिल्ली भिखारी समिति के अध्यक्ष जिज्ञासापति कुलश्रेष्ठ ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा, “मैं अपने बेटे को नेगोसिएशन और परसुएशन टेक्नीक का एक कोर्स करने के लिए स्टैंडफोर्ड भेजना चाह रहा था, क्योंकि ये दोनों स्किल हमारे बिज़नस के लिए काफी ज़रूरी हैं। परंतु नोट बंदी के कारण ज़रूरी कैश जमा नहीं हो पाया। अब हमने एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है जो वित्त मंत्री जी से मिलेगी और छोटे चिल्लर नोट बढ़ाने की मांग करेगी। हम डिजिटल वॉलेट से भी भीख ले रहे हैं लेकिन हमारी मांग है कि उस पे मर्चेंट फीस एक परसेंट से घटाकर आधा परसेंट किया जाए। भिखारियों के लिए छोटे नए तरीके के पॉइंट ऑफ़ सेल डिवाइस के मुद्दों पर भी ये समिति वित्त मंत्री जी को कुछ सुझाव देगी। हम जल्द ही एक प्रेस कांफ्रेंस द्वारा आप लोगों को अपडेट करेंगे।”



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