Friday, 28th April, 2017
चलते चलते

ऐंग्री यंग मैन विजय ने लपक कर उठाई सौ के नोटों की गड्डी, कहा आज उठाऊंगा फेंके हुए पैसे

12, Dec 2016 By Pagla Ghoda

मुम्बई: देश में नोटबंदी का असर कम होता दिखाई नहीं दे रहा है। जिसका असर गुंडे बदमाशों पर भी काफी बुरा पड़ा है। ऐंग्री यंग मैन विजय जो कि एक समय डाबर साहब के दिए हुए पैसे तभी लेता था अब वो उसके हाथों में दिए जाते थे, आजकल आलम ये है के वो फेंके हुए पैसे भी फ़ौरन बिना चूं-चपड़ किये उठा लेता है।

फेके हुए पैसे उठाने के बाद शान से बैठा विजय
फेके हुए पैसे उठाने के बाद शान से बैठा विजय

डाबर साहब के फार्महाउस पर जब हम उनसे मिलने गए तो वो पुराने अंदाज़ में व्हिस्की पी रहे थे। उन्होंने बताया, “भाई ये मोदी जी ने बहुत अच्छा किया नोटबंदी करके,साला विजय को लाइन पे ला दिया। वैसे तो सब पैसे उसने मेरी वजह से ही कमाए हैं, पर हमेशा मुझे ही हूल देता रहता था था। कहता था, मेरे पास बिल्डिंग हैं, बैंकबैलेंस, है बंगला है, गाडी है, क्या है तुम्हारे पास? मैं कहता था बरखुद्दार, मेरे पास भी यही सब है और तुझसे डबल ही है। इतना ही नहीं पहले जब मैं उसे सौ सौ के नोटों की गड्डी फेंक के देता था, तो वो बड़ी गहरी आवाज़ में बोलता था, “डाबर साहब, मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता” और फिर मुझे झुककर उठाकर उसे देने पड़ते थे। बेटा अब तुम ही बताओ, इस उम्र में जब सर्वाइकल ने मेरी पीठ तोड़ रखी है तो मैं बार बार कैसे झुकुँ? लेकिन 8 नवम्बर के बाद से चीज़ें बदली हैं। अब जैसे ही मैं सौ सौ के नोटों की गड्डी निकल कर टेबल पे फेंकता हूँ विजय तुरंत उसे कैच कर लेता है और करेगा क्यों नहीं, इस नोटबंदी के ज़माने में सौ सौ के रखता कौन है हमारे सिवाय।” डाबर साहब ने मूछों पर एक ज़ोरदार ताव दिया।

स्वयं ऐंग्री यंग मैन विजय से जब हमने इस बाबत बात की तो पहले तो वो काफी एंग्री हो गया, बाद में उसकी गर्लफ्रेंड अनीता ने उसे जब उसके लिए एक ड्रिंक बनाई तोउसने कहा, “हाँ तो अपन का उसूल है न “दीवार” मूवी के टाइम से, के अपन फेंके हुए पैसे नहीं उठाता। जब डाबर साहब पैसे हवा में उछालते हैं तो ज़मीन पे गिरने से पहले ही अपन डाइव मार के उसको कैच कर लेता है, ज़मीन पे ज़रा भी टच नहीं होने देता। अपन का उसूल अभी भी वोइच है, बस अभी थोड़ा अपना स्टाइल चेंज किया है।”

विजय के भाई इंस्पेक्टर रवि से जब इस बारे में बात की गयी तो तो वो हमेशा की तरह फिलोसोफिकल हो गए। बोले “एक भाई के बारे में पूछेंगे तो एक भाई जवाब देगा और मुजरिम के बारे में पूछेंगे तो एक पुलिस वाला जवाब देगा। अपने गुनाहों का जवाब एक न एक दिन विजय को देना ही होगा। जिन रास्तों पर वो चल पड़ा है उन पर वो अपनों को बहुत पीछे छोड़ आया है, उनका अंजाम सिर्फ अँधेरा है और बर्बादी है। जिस दिन मैंने उसके घर से आय से अधिक संपत्ति के पुराने नोट ज़ब्त कर लिए, उस दिन उसकी कलाइयां होंगी और मेरी हथकड़ी।” इंस्पेक्टर अजय ने आंसू पोंछते हुए खुद को संभाला और विजय के घर छापा मारने के लिए चल दिए।



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