Tuesday, 30th May, 2017
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कंपनी इंश्योरेंस के बारे में पता चलते ही डॉक्टर ने बुखार-पीड़ित को किया बाईपास-सर्जरी के लिए भर्ती

14, Aug 2016 By Pagla Ghoda

नयी दिल्ली: दिल्ली के ‘गोल्डन वाटर हस्पताल’ में उस समय हाहाकार मच गया जब एक बुखार पीड़ित व्यक्ति मक्खनचंद पांडे को डॉक्टर नें बाईपास सर्जरी के लिए भर्ती करवा डाला और उसके परिवार जनों से तुरंत पौने सात लाख रुपया जमा करवाने को कहा। सूत्रों के अनुसार मक्खनचंद पांडे के बड़े भाई चुलबुल पांडे गुड़गांव की एक मल्टीनेशनल कम्पनी में एक सॉफ्टवेर इंजीनियर हैं। उनकी कंपनी की इंश्योरेंस स्कीम के तहत उन्हें और उनके परिवार जनों को “cashless” हस्पताल खर्च की सुविधा उपलब्ध है।

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बहीखाता चेक करते डॉक्टर छेदीलाल वर्मा (स्पेशलिस्ट)

ICU में होने के कारण स्वयं मक्खनचंद पांडे से तो बात नहीं हो पायी परंतु उनके पिता श्री प्रजापति पांडे ने बताया, “अजी कुछ मत पूछिये! दो दिन से हमारे मक्खी को बुखार था, और चाय, काढ़ा इत्यादि से भी ठीक नहीं हो रहा था, तो उसे ले आये डाक्टर के पास। यही गलती हो गयी। जैसे ही डॉक्टर को पता चला कि हमारे बड़े बेटे के पास कंपनी वाली फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस है, उसका तो चेहरा खिल गया। पास खड़े दो कंपाउंडरों ने तो मारे ख़ुशी के मेरे पैर छू लिए। मक्खी, जिसका पहले सिर्फ़ बुखार नापा जा रहा था, को स्ट्रेचर पे लिटाकर उसका बीपी नापा जाने लगा। डॉक्टर ने कहा कि इनकी तो आर्टरी में ब्लॉकेज लग रही है, जिस वजह से बुखार भी है और बीपी भी थोड़ा हाई है, तुरंत ऑपरेशन करने पड़ेगा, और मुझसे तुरंत साढ़े छह लाख रुपया जमा करवाने को कहा। जब मैंने ऑपरेशन के बाबत ज़्यादा पूछताछ की तो डॉक्टर ने कहा कि अरे चाचा घबराते क्यों हैं! पैसे तो इंश्योरेंस वाले देंगे, आप तो बस ऑपरेशन करवा दो लड़के का फटाफट!”

मक्खी के डॉक्टर श्री छेदी वर्मा (स्पेशलिस्ट) ने इस मामले में पेशेंट-डॉक्टर प्रिविलेज के तहत कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। परंतु कंपाउंडर मनोज ने इस मामले में काफी खुलकर बात की। मनोज ने बताया, “आज से दो साल पहले जब मैंने सेल्स एंड मार्केटिंग में अपना एम.बी.ए. किया था तो मैंने कतई नहीं सोचा था कि एक दिन मैं कंपाउंडर की नौकरी करूँगा। पर इस फील्ड में भाईसाहब पैसा बहुत तगड़ा है। अभी देखिये ये पांडे परिवार तो कम से कम बीस (लाख) के लिए अंदर गया। अपना कट पांच परसेंट है। महीने में ऐसे चार केस भी पकडे गए तो बस अपना काम पक्का! डॉक्टर साहब का कट तो और भी ज़्यादा है, खैर उनका सेल्स एंड मार्केटिंग का एक्सपीरियंस भी मुझसे काफी ज़्यादा है।”

इसी बीच एक युवती जो कुछ देर पहले खांसी ज़ुकाम की शिकायत लेकर आयी थी उसे गुर्दे के आपरेशन के लिए वार्ड में ले जाया जा रहा था। “जिस मरीज़ के पास लैपटॉप हो और वो बार बार जेब से निकाल के बड़ा वाला फ़ोन चेक करे, समझ लो सॉफ्टवेयर वाला है और ज़ाहिर है कि उसके पास कम से कम पांच लाख की कंपनी इंश्योरेंस तो होगी ही। जिस दिन ऐसा ग्राहक .. मेरा मतलब कि मरीज़ फँस जाता है .. मेरा मतलब कि आ जाता है, उस दिन तो शाम को बच्चों के लिए मिठाई लेकर ही घर लौटता हूँ।” मनोज नें हँसते हुए बताया।



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