Saturday, 29th April, 2017
चलते चलते

एसी की हवा खाने के लिये ATM में गार्ड बना बेरोज़गार सिविल इंजीनियर

04, May 2016 By बगुला भगत

ग़ाज़ियाबाद. यूपी में जहां लाखों लोग गर्मी और बेरोज़गारी से परेशान हैं, वहीं एक बेरोज़गार सिविल इंजीनियर ने इन दोनों से बचने का एक अनोखा तरीक़ा ढूंढ निकाला है। प्रमोद शर्मा नाम के उस इंजीनियर ने एक बैंक के एटीएम में गार्ड की नौकरी कर ली है।

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दोपहर को एटीएम के एसी में चैन से सोता प्रमोद शर्मा

दयावती अग्रवाल मॉडर्न नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (DAMN-IT) से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके प्रमोद को यह आइडिया उस समय आया, जब कुछ दिन पहले वो अपने अकाउंट में बैलेंस चेक करने एक एटीएम में घुसा था। दोपहर का टाइम था और गर्मी की वजह से उसका बुरा हाल था। अंदर घुसते ही एसी की ठंडी हवा में उसे ऐसा सुकून मिला कि बाहर निकलने का मन ही नहीं किया।

चार-चार बार बैलेंस चेक करने के बाद भी जब वो वहीं खड़ा रहा तो गार्ड को शक हुआ। उसने पूछा- “भाईसाब, क्या हुआ?”, प्रमोद ने जवाब दिया- “कार्ड अंदर फंस गया है”, तो गार्ड ने कहा- “हटो, मैं देखता हूं!” बस इसी बात पे दोनों में झगड़ा शुरु हो गया। गार्ड उसे एटीएम से बाहर धकेलने लगा।

“तो तुम अंदर क्यूं बैठे हो, तुम भी बाहर चलो!” -गार्ड को साथ में बाहर खींचते हुए प्रमोद बोला।  “मैं तो अपनी डूटी कर रहा हूं। तुम्हारी तरह ठाली नहीं हूं।” -कहते हुए गार्ड ने झटककर ख़ुद को छुड़ाया और “एसी में रहना है तो हमारी तरह नौकरी करो” -कहते हुए वापस अंदर जा बैठा।

यह सुनते ही प्रमोद के दिमाग़ की बत्ती जल गयी। उसने सोचा- “यार, चार पैसे भी मिलेंगे और एसी की ठंडी हवा भी!” उसने फुटपाथ से ’10वीं, 12वीं, ग्रेजुएशन पास/फेल गार्ड, हेल्पर, सुपरवाइजर बनें और 8000 से 15000 तक कमायें’ वाली जॉब का फॉर्म लेकर तुरंत अप्लाई कर दिया और उसी दिन नौकरी भी शुरु कर दी।

जब घरवालों ने उससे पूछा कि “आजकल सारा दिन कहां ग़ायब रहते हो?” तो उसने यह कहते हुए टरका दिया कि “एक कंपनी में ‘समर जॉब’ मिल गयी है।” अब प्रमोद से प्रेरित होकर देश के लाखों बेरोज़गार इंजीनियर गार्ड की नौकरी के लिये अप्लाई कर रहे हैं। वे गर्मी से तो बचेंगे ही, साथ में कुछ पैसे भी मिल जायेंगे। यानि आम के आम और गुठलियों के दाम!



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