Wednesday, 20th September, 2017

चलते चलते

90% भारतीय बर्थडे पार्टी से लौटकर कहते हैं- 'केक अच्छा नहीं बना था ना!' -रिसर्च

10, Sep 2017 By Ritesh Sinha

मुंबई. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज (TISS) के छात्रों ने अपनी ताज़ा रिसर्च में पाया है कि इंडिया के लगभग 90% लोग, जब भी किसी बर्थडे पार्टी से लौटकर आते हैं, तो केक की बुराई करना नहीं भूलते। पार्टी में उसी केक को ये लोग जी भरकर खाते हैं लेकिन पता नहीं घर आने के बाद इन्हें क्या हो जाता है? अचानक वही केक उन्हें औसत दर्जे का लगना शुरू हो जाता है, जिसे थोड़ी देर पहले वो दस-दस बार खाकर आए होते हैं।

Gossip-pick up
पत्नी से बर्थडे केक की बुराई करता प्रमोद

TISS के होनहार छात्र भुवन केकवाला ने अपनी रिसर्च के बारे में बताया कि, “देखिए! हमें अपने सर्वे के दौरान एक बंदा या बंदी नहीं मिली जो दूसरों के घर के “केक” को पसंद करती हो! पार्टी से आकर वो एक ना एक बार जरूर कहते हैं- “…लेकिन केक अच्छा नहीं बना था ना! मज़ा नहीं आया!”

“ऐसा किस वजह से होता है?” ऐसा पूछे जाने पर भुवन ने बताया कि, “देखिए! ये सब ‘उँगली-करानुलेटस’ नाम के वायरस के कारण होता है, जिसका प्रकोप दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा देखा गया है! और दुःख की बात ये है कि अभी तक इसका कोई इलाज भी नहीं है!” -उन्होंने थोड़ा निराश होते हुए कहा।

इस रिसर्च की सत्यता की जांच के लिए हमने कई लोगों से बात की, जो आए दिन किसी ना किसी के बर्थडे में जाते रहते हैं। प्रमोद नाम के एक बंदे ने बताया कि “मेरे दोस्त की बेटी है ना, चिंकी! तो हम उसकी बर्थडे पे गए थे। पार्टी तो देखने लायक थी भाईसाब! क्या खर्चा किया था मेरे दोस्त ने! अरे कौन नहीं आया था उस पार्टी में? लेकिन…केक थोड़ा मजेदार नहीं था, वरना पार्टी में चार चाँद लग जाते।”

“पता नहीं किस बेकरी वाले को आर्डर दिया था उन्होंने, बिल्कुल भी टेस्टी नहीं था! इससे अच्छा तो घर पे ही सिंपल सा केक बना लेते, बाहर से लाने के बजाय। इतना महंगा गिफ्ट लेकर जाओ, और केक भी ढंग का ना मिले ना, तो सारा मूड ही खराब हो जाता है!” -प्रमोद ने सड़ा सा मुँह बनाते हुए कहा।



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