Friday, 20th January, 2017
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दुनिया की आबादी से ज़्यादा हो गये व्हॉट्सएप ग्रुप: सर्वे

10, Jun 2016 By बगुला भगत

फ़िलाडेल्फ़िया. स्मार्टफ़ोन के अविष्कार की बदौलत आज इंसान नयी-नयी ऊंचाईयां छू रहा है। पहले कुत्ते और घोड़े इंसान के सबसे क़रीबी हुआ करते थे लेकिन अब स्मार्टफ़ोन्स ने उनकी जगह ले ली है। आज इंसान सोते-जगते, खाते-पीते, हगते-मूतते स्मार्टफ़ोन को साथ रखता है। इन्हीं स्मार्टफ़ोन्स पर इंसानों ने व्हॉट्सएप ग्रुप बनाने शुरु किये, जिनके बिना आज इंसान के वजूद की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

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व्हॉट्सएप ग्रुप्स की आबादी बढ़ाता महिलाओं का एक ग्रुप

व्हॉट्सएप ग्रुप बनाने में लोग इतने जी-जान से लगे हुए हैं कि उन्हें देखकर लगता है कि जैसे उनका जन्म इसी काम के लिये हुआ था।

पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के एक सर्वे में ख़ुलासा हुआ है कि व्हॉट्सएप ग्रुपों की संख्या दुनिया की कुल आबादी को भी पार कर गयी है। दुनिया की आबादी इस समय लगभग 7 अरब 42 करोड़ है, जबकि व्हॉट्सएप ग्रुपों की संख्या 8 अरब से ज़्यादा हो चुकी है।

इस सर्वे में कहा गया है कि अगर ये ग्रुप इसी रफ़्तार से बढ़ते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब ये आबादी से चार गुना हो जायेंगे।

आपका भी कोई ऐसा दोस्त, रिश्तेदार, पति/पत्नी या फिर पड़ोसी ज़रूर होगा, जो व्हॉट्सएप के 50 या 60 ग्रुपों में है। दिल्ली के मयूर विहार में रहने वाली शालिनी गोयल दिन में चपातियों से ज़्यादा व्हॉट्सएप ग्रुप बनाती हैं। अपने बच्चों का मुंह देखने से ज़्यादा वो स्मार्टफ़ोन का मुंह देखती हैं।

शालिनी अपनी बेडशीट के कलर से लेकर नेल पॉलिश के कलर तक सब कुछ व्हॉट्सएप ग्रुप पर शेयर करती हैं। उनका कहना है कि “हम ये अपने फ्रेंड्स को चिढ़ाने के लिये थोड़े ही करते हैं, हम तो बस एक-दूसरे से अपनी खुशी शेयर करते हैं।”

इसके उलट, सर्वे में सामने आया है कि व्हॉट्सएप पर किसी जान-पहचान वाले का फ़ोटो देखते ही लोगों का सबसे पहला रिएक्शन होता है- “देखो तो सही, कैसी लग रही है!” या “ये भी क्या-क्या डालती रहती है!”



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