Sunday, 19th November, 2017

चलते चलते

फ़र्ज़ी पोस्ट्स को आगे फॉरवर्ड करने वाले लोगों के दिमाग अलमारी में बंद पाए गए

09, Sep 2017 By नास्त्रेदमस

एजेंसी. जंगल में लगी आग और शैम्पू से निकले झाग से भी तेज क्या फैलता है? सोचने की ज़रुरत ही नहीं है, इसका जवाब सीधा और सरल है- सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी ख़बरें! जी हाँ, जिस तरह झूठ को सच बताकर आजकल मार्केट में फैलाया जाता है और जिस तेजी से हम लोग बिना सोचे समझे ट्विटर और व्हॉट्सएप पर मिले मैसेजेज को आगे फॉरवर्ड करते जाते हैं, उसी को मद्देनज़र रखते हुए सर्वेश्वर कुमार नाम के एक शख्स ने एक सर्वे किया।

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व्हॉट्सएप मैसेज फ़ॉरवर्ड करते लोग

लोग ऐसा क्यों करते है यह जानने के लिए सर्वेश्वर ने फ़र्ज़ी ख़बरों को बिना सोचे-समझे और जाने आगे फ़ॉरवर्ड करने वालों के घरों पर छुप-छुप के छापा मारा। इस छापेमारी में इन लोगों के घरों में एक बड़ी सी अलमारी पायी गयी, जिसमें बड़े-बड़े ताले लगे हुए थे। सर्वेश्वर के अनुसार, इन अलमारियों पे जमी धूल-मिटटी देख के लगता है कि जैसे इन अलमारियों को सालों से नहीं खोला गया है। उसने जब इन अलमारियों को खोला तो अंदर पड़ी चीज़ को देख कर वह भौचक्का रह गया। वह चीज़ थी दिमाग!

जी हाँ! इन अलमारियों मेें इन लोगों के दिमाग पाए गये। पता चला कि इन लोगों ने तो सालों से अपने दिमाग़ का इस्तेमाल ही नहीं किया है। उसे कोई नुकसान ना हो जाये, इस डर से इन्होंने उसे अलमारी में बंद करके रख दिया है। तभी कोई अयोध्या में मंदिर और मस्जिद के लिए ऑनलाइन वोटिंग की खबरें फ़ैला रहा है तो कोई फ़र्ज़ी वीडियो और फ़र्ज़ी पोस्ट को बिना सोचे-समझे आगे फॉरवर्ड करता जा रहा है।

यह सर्वे जब राजनैतिक पार्टियों के सामने लाया गया तो उन्होंने इस सर्वे को ही फ़र्ज़ी करार दे दिया और इसे राष्ट्र-विरोधी बताते हुए एक और फ़र्ज़ी पोस्ट मार्किट में फैला दी। जिसे देखते ही लोग सर्वे को भूलकर इस फ़र्ज़ी पोस्ट को मार्केट में फ़ैलाने में लग गए।



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