Friday, 24th November, 2017

चलते चलते

शराब पीकर बनाये जाते हैं गोवा और लद्दाख ट्रिप वाले ज़्यादातर व्हॉट्सएप ग्रुपः सर्वे

09, Jul 2017 By नास्त्रेदमस

एजेंसी. हिमालय की ऊँचाईयों पे पहुंचने से लेकर समन्दर की गहराइयों को छूना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन इस सफ़र को शुरू करना भी उतना ही कठिन है, जितना इन्हें ख़त्म करना! एक पव्वे से लेकर पूरी बोतल तक लग जाती है एक ऐसा व्हाट्सप्प ग्रुप बनाने में। जी हाँ! ऐसा ही कुछ पता चला है एक सर्वे में, जिसे अंजाम दिया है दिल्ली के सर्वेश्वर कुमार ने।

Gao DCH
इस फ़ोटो ने बनवाये हैं सबसे ज़्यादा व्हॉट्सएप ग्रुप

फ़ेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए सर्वेश्वर ने इस सर्वे से जुड़े सभी तथ्य हमारे रिपोर्टर के सामने रखे। उन्होंने बताया कि “मुझे इस सर्वे को करने का ख्याल तब आया जब मैं खुद ऐसे 10 व्हॉट्सएप्प ग्रुप्स में जोड़ा गया। मैंने देखा कि मैं एक ही समय पे 5 तिब्बत ट्रिप और 5 गोवा ट्रिप वाले व्हॉट्सएप्प ग्रुपों में जुड़ा हुआ हूँ। जिनके नाम कुछ ऐसे थे ‘Lets Go Goa’, ‘अब तिब्बत दूर नहीं’, ‘ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा (Aim to Tibbet)’ आदि-इत्यादि!”

मुँह में तम्बाकू डालते हुए उन्होंने आगे बताया कि “इन ग्रुपों में शुरुआत में 20-30 लोग जोड़े जाते हैं फिर कुछ डायलॉगबाजी के बाद ज्यादातर लोग तो साइड हो जाते हैं और कुछ जो बच जाते हैं वो एक नंबर के स्पैम मास्टर होते हैं। दस लोगों को फॉरवर्ड करने वाले मैसेज इन ग्रुपों में चिपकाने लग जाते हैं। और कितना भी समझाओ लेकिन ये लोग नहीं मानते और कुछ ही दिनों में ये ग्रुप अपने मकसद से भटक जाते हैं और इनका नाम बदल के हो जाता है- ‘Freinds Forever’, ‘असली दोस्ताना’ आदि।”

“ऐसे ग्रुपों की बढ़ती संख्या देख के मेरे मन में यह क्यूरोसिटी जगी कि आखिर ऐसे ग्रुपों को बनाने के लिये लोगों को मोटिवेशन कहाँ से मिलता है? मैंने ग्रुप के बनते ही ग्रुप बनाने वाले को कॉल करना शुरू किया और तब मुझे पता चला इन ग्रुपों का असली मोटिवेशनल फैक्टर है शराब! जी हाँ शराब! जब लोग अपनी कैपेसिटी से एक-दो पैग ज्यादा लगा लेते हैं और अकेले में सोशल नेटवर्किंग साइट पे कोई लद्दाख या गोवा की फोटो देख लेते हैं, बस वहीं से शुरू हो जाता हैं ये घिनोना कृत्य!” -तंबाकू को मुँह में फिट करते हुए वो बोले।

“मैंने सभी महानगरों में बनने वाले ऐसे ग्रुप्स को ट्रैक किया और 95 प्रतिशत एडमिन शराब के नशे में धुत पाए गये। ज्यादातर को अगले दिन खुद भी याद नहीं था कि रात को नशे की हालत में उन्होंने ऐसा कोई ग्रुप बनाया था।”

फिर अपने मोबाइल पे कैलकुलेटर खोल के उन्होंने कहा कि “आंकड़ों के अनुसार अगर सच में इन ग्रुपों के मेम्बर इन ट्रिप्स पे जाने लग गये तो गोवा में जनवरी के महीने में विज़िट करने वाले लोगों की संख्या हो जाएगी 50 करोड़ और जून में लद्दाख में पाए जायेंगे 60 करोड़ लोग, मतलब भारत की आधी जनसँख्या!”

तभी सर्वेश्वर जी के व्हॉट्सएप्प पे एक मैसेज आया और मैसेज देखते ही जैसे वो पागल से हो गये और बोले “ब@@#$$ अब ये ‘MARS TRIP’ वाला ग्रुप किसने बनाया है बे!” और फोन वहीं पटक के भाग गये।



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