Thursday, 23rd February, 2017
चलते चलते

वाल-केयर पुट्टी वाले अंकलजी ने ट्रंप को चेताया, कहा- सीलन पपड़ी से मेक्सिको दीवार को बचाओ

31, Jan 2017 By Pagla Ghoda

अमेरिका मेक्सिको बॉर्डर: किसी ने सच ही कहा है कि काम के लिए बस एक जज़बा होना चाहिए, और मामूली से मामूली इंसान कहाँ से कहाँ पहुँच जाता है। यही हाल है सदैव “पेंट से पहले पुट्टी” लगाने की हिदायत देने वाले चोटरानी साहब का। पहले तो वो भारत भर में घूम कर लोगों को पेंट से पहले पुट्टी लगाने की हिदायत देते थे। ना मानने पर दूसरों के मकानों में काम कर रहे मजदूरों, कारीगरों और कॉन्ट्रेक्टरों से भिड़ जाते थे। अब हालात ये हैं कि वो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लीडिंग पुट्टी-कंसलटेंट यानी के उच्चस्तरीय पुट्टी सलाहकार हैं। जो अमेरिका मेक्सिको पर बन रही दीवार बनवाने में उन्हें सलाह मशविरा दे रहे हैं। उनके पैशन यानी के जज़बे ने उन्हें अब फॉरेन में भी जॉब दिलवा दी है।

खुश होते चोटरानी साहब
खुश होते चोटरानी साहब

एक मेक्सिकन मज़दूर को ज़ोर से डांटते हुए चोटरानी साहब गरजे, “अरे ठीक से लगाओ ई दीवार पे पुट्टी, इससे सीलन और पपड़ी का कोई चांस नहीं रहेगा। और दीवारें बोल उठेंगीं। क्या बोले तुम? दीवारें बोलती नहीं है? अरे ज़रूर बोलती हैं, मैं तो घंटों उनसे बातें करता हूँ। देखो उधर लगी एक ईंट ने मुझे अभी अभी हाइ हेल्लो बोला।”

मजदूर को काम पर लगाकर चोटरानी साहब पीछे पलटे और हमारे रिपोर्टर की खबर लेनी शुरू की। बोले, “आपने अपने घर पे सभी दीवारों पर पेंट से पहले पुट्टी लगाई है क्या? कौन ब्रांड की है, कौन जात की है?” इत्यादि। सौभाग्यवश रिपोर्टर भी मंझा खिलाड़ी था, अपना होमवर्क करके आया था। उसने सभी बड़े पुट्टी ब्रांड्स के नाम और उनके फायदे गिनाकर चोटरानी साहब को चुप करवा दिया।

उसकी पुट्टी नॉलेज से खुश होकर चोटरानी साहब ने अपने इस पुट्टी पैशन की सच्चाई पहली बार किसी को बताई। दरअसल आठ साल की उम्र में चोटरानी साहब के पास एक छोटा सा क्यूट पप्पी था जिसे वो प्यार से भूरे कहते थे, क्योंकि वो गहरे भूरे रंग का था। लेकिन चूंकि उनके पिता जी ने घर में पेंट से पहले पुट्टी नहीं लगवाई थी इसलिए दीवार पर से पपड़ी गिरने लगी। एक दिन उनमें से किसी एक दीवार से खूब साड़ी पपड़ी भूरे पर आ गिरी। भूरे को कोई चोट तो नहीं आयी क्योंकि वो सिर्फ पपड़ी थी, लेकिन उसका रंग भूरे से सफ़ेद हो गया। उन्होंने उसे काफी नहलाया पर उसका रंग अब हल्का सफ़ेद मटमैला हो चुका था। बालक चोटरानी को इस हादसे से इतना गहरा आघात पहुंचा के उन्होंने भूरे को एक कुत्तों के अनाथ आश्रम में भिजवा दिया, जहाँ बाद में उसे एक अमेरिकी दंपत्ति ने गोद ले लिया।

बस उसी दिन से वो सीलन और पपड़ी के एकदम खिलाफ है। और आज भी वो अपने घर की दीवारों से यही बातें किया करते हैं, कि कुछ भी करना पर अपनी पपड़ी गिरा के किसी भूरे को मटमैला मत करना।



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