Sunday, 25th February, 2018

चलते चलते

बूंदी के लड्डूओं पर फूटा राष्ट्रपति का गुस्सा, कहा- "इस साल तो कुछ नयी मिठाई बांटो!"

26, Jan 2018 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस, बूंदी के लड्डूओं के बिना सब अधूरे हैं, जहाँ देखो वहां इस दिन मिठाई के नाम पर बूंदी के लड्डूओं को बांटकर खानापूर्ति कर दी जाती है। लेकिन इस बुराई पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी की नज़र पड़ गई है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश के नाम संदेश देते हुए उन्होंने बूंदी के लड्डूओं पर जमकर निशाना साधा। हमेशा शांत रहने वाले कोविंद जी कई बार दाँत रगड़ते नज़र आए।

कब तक मिलेंगे बूंदी के लडडू
कब तक मिलेंगे बूंदी के लडडू

उन्होंने कहा कि, “कब तक मिठाई के नाम पर बूंदी बाँटकर जनता को मूर्ख बनाते रहोगे! मैं देशवासियों से अपील करता हूँ कि इस साल रिपब्लिक-डे कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कुछ अच्छी मिठाई बाँटी जाए! बच्चे बूँदी खा-खाकर बोर हो चुके हैं! पहले देश में पैसों की कमी थी तो ये सब चल जाता था, लेकिन अब तो शर्म करो!”

“जब मैं पढता था, तब भी यही चलता था और आज भी ज्यादातर बूंदी के लड्डू ही बांटे जाते हैं, हमें अब इस बुराई को पीछे छोड़ना होगा! समय की मांग है कि अब हमें बूंदी के लड्डूओं को छोड़कर काजू कतली की ओर यात्रा शुरू कर देनी चाहिए! मैसूर पाक, कलाकंद या बर्फी भी चलेगा! इसलिए मैं अपील करता हूँ कि इस साल स्कूलों में, चौराहों में, ऑफिस में, सरकारी कार्यक्रमों में बूंदी के लड्डू ना बाँटे जाएँ! बहुत हो गया यार, इस साल कुछ नया करो!”

साथ ही उन्होंने असामाजिक तत्वों पर भी कटाक्ष किया- “आज के दिन जो लोग अपने दोस्तों को फोन करके बुलाते हैं कि, “आजा बे! यहाँ मिठाई बंट रही है!” ऐसे लोगों को कम से कम छः महीने की सजा तो होनी ही चाहिए!” इसके बाद उन्होंने ‘जय हिन्द’ कहते हुए अपना संबोधन समाप्त किया। सूचना मिली है कि राष्ट्रपति की इस अपील का भी कोई असर नहीं होने वाला है, और इस साल भी धड़ल्ले से बूंदी के लड्डू बाँटे जाएँगे।



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