Tuesday, 17th October, 2017

चलते चलते

मोदी जी हुए कवि, 'मन की बात' में सुनाई कविता- "देश नये जाता हूँ"

11, Jun 2017 By नास्त्रेदमस

एजेंसी. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नक़्शे-क़दम पर चलते हुए वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी अब कविताई शुरु कर दी है। चार देशों की यात्रा से लौटते ही मोदी जी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में शानदार कविता ‘देश नये जाता हूँ’ सुनाई, जिसमें उनके राजनैतिक जीवन और विदेश यात्राओं की झलक दिखायी दी। प्रस्तुत है पूरी कविता

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‘मन की बात’ में कविता सुनाते मोदी जी

चलते फिरते इन विमान पथ पर

देश के विकास के अदभुत रथ पर

कुर्ते पायजामे पे शाल लपेटकर

नई उड़ान भर आता हूँ

मैं देश नये जाता हूँ

देश नये जाता हूँ|

विपक्ष करता रहता खटपट

मेरी निंदा से होके लथपथ

विषैले काले नाग सा सरपट

पर मैं भी उनको जलाता हूँ

जब देश नये जाता हूँ

देश नये जाता हूँ|

एक हाथ ऊपर उठाकर

मित्रों-मित्रों के नारे लगाकर

रैलों पे रैले हाउसफुल कराकर

हर राज्य जीतकर लाता हूँ

फिर देश नये जाता हूँ

देश नये जाता हूँ|

काल के कपाल पर

केजरू, ममता की चाल पर

विपक्ष की हर बॉल पर

चौके-छक्के लगाता हूँ

फिर देश नये जाता हूँ

मैं देश नये जाता हूँ||

अटल जी की शैली में लिखी गई यह कविता सोशल मीडिया पर भयंकर वायरल हो रही है। हमारे गुप्त सूत्रों ने बताया है कि जल्द ही इस कविता का एक वीडियो एलबम भी बनाया जायेगा, जिसमें अपनी सारी विदेश यात्राओं की क्लिपिंग्स के साथ मोदी जी ख़ुद नज़र आयेंगे।



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