Thursday, 21st September, 2017

चलते चलते

बकरों की क़ुर्बानी के खिलाफ PIL रद्द, जज ने कहा- "जब बकरे कुछ नहीं बोल रहे तो आप को क्या तकलीफ़ है?"

12, Sep 2016 By banneditqueen

नयी दिल्ली. पिछले काफी समय से जानवरों के बलिदान और माँस के सेवन पर बहस चल रही है। गौमाँस खाने पर सरकार पहले से ही प्रतिबंध लगा चुकी है। PETA नामक संस्था के कुछ लोगों ने पिछले वर्ष भोपाल में ईद पर बकरों की बलि चढा़ने का विरोध किया था जो कि असफल रहा। इस वर्ष भी बकरा काटने की प्रथा के खिलाफ PIL दर्ज की गई। दिल्ली निवासी प्रथम शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में बकरा ईद के दौरान खुलेआम बकरा काटने की प्रथा के खिलाफ PIL दायर की।

आमरण अनशन करने जाते प्रथम
आमरण अनशन करने जाते प्रथम

हालाँकि कोर्ट ने यह PIL रद्द कर दी। PIL रद्द होने के बाद प्रथम ने आमरण अनशन करने का ऐलान किया है। बातचीत में प्रथम ने बताया कि “यह एक दम अनुचित फैसला है, जब कोर्ट संता-बंता और दही-हांडी पर PIL मंज़ूर कर सकती है तो इसके खिलाफ क्यूँ नही?” PIL रद्द करने वाले जज प्रकाश झुनझुनवाला ने इसका जवाब फेकिंग न्यूज़ संवाददाता को दिया, “देखिये, संता-बंता चुटकुलों से सरदार समुदाय के लोगों की भावनाएँ आहत हो रही थीं, दही-हांडी में बच्चों के ऊँचाई से गिरकर चोट लगने का डर था। दोनों ही स्थितियों में जिसके लिये PIL दाखिल की गई थी उन्हें तकलीफ थी। अब इस मामले में बकरों के लिये PIL दायर की गई है पर आप ही बताइये क्या बकरों ने अभी तक कुछ बोला? क्या उन्होंने कहा कि उनको तकलीफ है? तो जब उन्हें कोई तकलीफ नहीं है तो औरों को क्या दिक़्क़त है बकरा कटने से?”

इस बयान के बाद फेकिंग न्यूज़ संवाददाता ने कुछ बकरों से बातचीत करने की कोशिश की, पर वे ‘मैं मैं’ के अलावा कुछ और बोलने को राज़ी ही नहीं थे। फिलहाल प्रथम कोर्ट के सामने बकरे की वेशभूषा धारण किये प्रदर्शन कर रहे हैं।



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