Thursday, 25th May, 2017
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शादी ब्याह में पीकर ज़ोर ज़ोर से नागिन डांस करने वालों पर लगेगा पशु विकास सेस

13, May 2017 By Pagla Ghoda

दिल्ली: शादी ब्याह में बहक कर ज़ोर ज़ोर से नागिन डांस करने वाले अब ज़रा सोच समझ कर ही ऐसा नृत्य करें क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें भारी मात्रा में पशु विकास सेस भरना पड़ सकता है।

naagin danceसेंट्रल टैक्स एंड एक्साइज एक्सपर्ट डॉक्टर पॉलिसीलाल वसूली बताते हैं, “दारु पीकर नागिन डांस करने में लोगों को मज़ा तो बहुत आता है लेकिन ये पशुओं समान व्यवहार दुसरे बारातियों को काफी खटकता है। शादी ब्याह में आये बहुत से लोग ये चाहते हैं के जल्दी जल्दी सब रस्में पूरी हों और वो शगुन पकड़ा के और भरपेट खाना खाके फ़ौरन घर कट लें। लेकिन नागिन डांस वाले लोगों के बिना रुके नाचते रहने से बारात लेट हो जाती है, और खाना लेट खुलता है। अब खाना खुलते ही उसपे टूट नहीं सकते तो बाकी लोगों को थोड़ा और वेट करना पड़ता है। इससे कई लोगों को घर पहुँचते पहुँचते काफी लेट हो जाता है, जो काफी दुखद है।”

अपने बिल्ले को एक कटोरी दूध पिलाकर डॉ वसूली ने आगे बताया, “अभी दो हफ्ते पहले ही मैं और मेरी धर्मपत्नी अपने पडोसी के साले के ममेरे भाई के मुंहबोले बेटे की शादी में गए थे। प्रीतिभोज का समय नौ बजे था लेकिन नागिन डांसरों की देरी की वजह से खाना पूरे पौने ग्यारह बजे खोला गया। इतने में तो स्टार्टर्स वाला पनीर टिक्काऔर आलू चटपटा खा खा के ही हमारा पेट भर गया था, जबकि मेन कोर्स में छतीसों आइटम थे। अपनी प्रिय रबड़ी-जलेबी भी मैं केवल एक प्लेट ही खा पाया था।”

जानवरों के विशेषज्ञ डॉक्टर पशुपतिनाथ जंतरी ने भी इस विषय में रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “कब तक हम लोग श्रीदेवी की फिल्मों से प्रेरित होके इस प्रकार नागोंका और उनके नागिन-नृत्य का मज़ाक उड़ाते रहेंगे। नाग भी पशु श्रेणी में आते हैं, और उनके भी कुछ सम्मानजनक अधिकार हैं। सरकार को ऐसा मखौल उड़ाने वालानृत्य करने वाले लोगों से “पशु विकास सेस” वसूल के नागों और दुसरे रेप्टाइल श्रेणी के जीवों के लिए आश्रालय खोलने चाहिए। उनके विकास के लिए कुछ फण्ड स्थापितकिये जाने चाहियें।”

नागिन डांस एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (नाग.दा.) की दिल्ली ब्रांच के प्रेजिडेंट श्री सर्पेष बहुमुखी ने इस विषय पर कोई भी औपचारिक टिपण्णी करने से इंकार कर दिया परये ज़रूर कहा के नृत्य एक प्रकार की अभिव्यक्ति है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत नागिन डांस एक पियक्कड़ व्यक्ति का अधिकार है। लिहाज़ा वो इस “पशुविकास सेस” के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट तक जायेंगे। इच्छाधारी नाग सपोर्ट ग्रुप से भी इस मामले में टिपण्णी मांगी गयी थी, लेकिन फेकिंग न्यूज़ द्वारा उन्हें भेजे गए एकईमेल का अभी तक रिप्लाई नहीं आया है।



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