Friday, 24th November, 2017

चलते चलते

शेयर कैब में पूरा शहर घूमते रह गया और नहीं पहुँच पाया ऑफ़िस

04, Nov 2017 By Guest Patrakar

मुंबई. अगर आपको लगता है कि एक बॉर्डर में खड़े जवान की ज़िंदगी सबसे ज़्यादा तनावपूर्ण होती है तो आप यह समझ लीजिए एक नौ से छः नौकरी करने वाले की ज़िंदगी में भी कम परेशनियाँ नहीं होती। सुबह उठते से ही बॉस की कल शाम वाली डाँट याद आ जाती है। थोड़ा आगे बढ़ो तो एक तरफ मकानमालिक किराए के लिए सुना रहा होता है और एक तरफ़ घरवाले फ़ोन कर के शादी के लिए। और इस सब पर भी जब वक़्त से रेस करते करते वो ऑफ़िस जाने की सोच ले लेकिन वक़्त पर नहीं पहुँच पाए तो उस से ज़्यादा बेज़्ज़ती की बात और कोई नहीं होती है। ऐसा ही हुआ मुंबई शहर के चंदन कुमार के साथ। जिन्होंने जल्दी पहुँचने के लिए शेयर कैब तो ली लेकिन ऑफ़िस नहीं पहुँच पाए।

ओला बुक करता युवक
ओला बुक करता युवक

मुंबई के चंदन एक इंजीनियर है और एक बड़ी कम्पनी में छोटी सी नौकरी करता है। सोमवार सुबह जब चंदन ऑफ़िस के लिए निकला तो रोज़ की तरह उसने उस दिन भी जल्दी ऑफ़िस पहुँच कर बॉस की डाँट से बचने की ठान ली। लेकिन क़िस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था। अपनी जेब और समय के बीच समझौता करते हुए चंदन ने शेयर कैब बुक की। क़िस्मत से चंदन के साथ और कोई नहीं था, मगर आधे रास्ते पहुँचते ही ड्राइवर का फ़ोन बजने लगा और चंदन के दिल की धड़कन।

चंदन ऑफ़िस से एक किलोमीटर की दूरी पर ही था कि कैब ड्राइवर का फ़ोन एक बार फिर बज उठा, नया कस्टमर बैठा और कैब चल दी पुराने कस्टमर को छोड़ने। चंदन की क़िस्मत मानो उसकी दुश्मन बन गयी थी, पुराने कस्टमर के उतरते ही ड्राइवर को फोन फिर एक बार बज उठा।

ये सिलसिला बस चलता ही रहा, एक तरफ़ ड्राइवर का फोन बजता रहा और दूसरी तरफ़ चंदन का फोन। चंदन अपने बॉस को बस यही बोलता रहा कि बस पहुँच रहा हूँ। मगर चंदन पहुँच नहीं पाया।

फ़ेकिंग न्यूज़ संवाददाता ने बात की चंदन से। चंदन ने पहले तो गालियाँ देनी शुरू की मगर फिर कुछ देर बाद उन्होंने कहा – सबसे पहले तो ये कैब का नाम बदल कर मुंबई दर्शन करो, पूरा मुंबई घूम लिया बस वहीं एक जगह नहीं गया जहाँ जाना था।

चंदन की इस हरकत से उसके बॉस काफ़ी नाराज़ हुए और उसे ऑफ़िस से बाहर निकालने की धमकी भी दे डाली। लेकिन वो जानते है कि चंदन इंजीनियर है और लेट होना उसका जन्मसिद्ध अधिकार है बस इसीलिए उसे एक बार फिर माफ़ कर दिया।

मामले की गंभीरता को समझते हुए हमने उस दिन चंदन की कैब ड्राइवर से बात की। अशोक खड़गोपर जो कि तीन साल से कैब चला रहे है उन्होंने बताया “ये जो फोन में मैप बताता है मैं वैसा ही करता हूँ, मैं एक शादी शुदा आदमी हूँ और मैप वाली लड़की की आवाज़ मेरी पत्नी से मिलती है इसलिए मैं बिना सोचे उसकी बात मानता हूँ।”

आदत बिगाड़ने वाले तो बहुत मिल जाते है। लेकिन अगर इंसान अपनी आदत बदलना चाहे तो कोई सामने नहीं आता है। चंदन के साथ भी ऐसा ही हुआ। अब सवाल यह है कि क्या ऐसी घटनाओं के बाद चंदन जैसे लड़के दोबारा ऑफ़िस समय से जाने का प्रयास करेंगे?



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